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रेणुका बांध विस्थापितों की दो बड़ी मांगें मंजूर, संघर्ष समिति बोली- समस्याएं सुलझती रहीं तो परियोजना को देंगे पूरा सहयोग

लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे रेणुका बांध प्रभावितों के रुख में अब बदलाव के संकेत दिखाई दिए हैं। संघर्ष समिति का कहना है कि सरकार, जिला प्रशासन और एचपीपीसीएल ने उनकी दो महत्वपूर्ण मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेकर भरोसा बढ़ाया है।

नाहन : लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे रेणुका बांध प्रभावितों के रुख में अब बदलाव के संकेत दिखाई दिए हैं। संघर्ष समिति का कहना है कि सरकार, जिला प्रशासन और एचपीपीसीएल ने उनकी दो महत्वपूर्ण मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेकर भरोसा बढ़ाया है। समिति ने साफ कहा कि यदि भविष्य में भी प्रभावित परिवारों की जायज मांगों का इसी तरह समाधान होता रहा तो वे रेणुका बांध परियोजना के निर्माण में पूरा सहयोग देंगे। हालांकि समिति ने स्पष्ट किया कि अभी कई अहम मुद्दों का समाधान होना बाकी है।

रविवार को नाहन में आयोजित पत्रकार वार्ता में रेणुका बांध विस्थापित संघर्ष समिति के प्रेस सचिव योगी ठाकुर ने बताया कि समिति लगातार विस्थापित परिवारों की समस्याओं को सरकार और परियोजना प्रबंधन के समक्ष उठा रही है। हाल ही में दो महत्वपूर्ण मांगों पर सहमति बनने से प्रभावित परिवारों को बड़ी राहत मिली है।

उन्होंने बताया कि अब तक गृहविहीन श्रेणी का लाभ लेने के लिए अलग बिजली मीटर नंबर देना अनिवार्य था, लेकिन क्षेत्र में कई संयुक्त परिवार एक ही मकान और एक ही बिजली मीटर का उपयोग करते हैं, जिससे पात्रता साबित करने में कठिनाई आ रही थी। समिति की मांग पर परियोजना प्रबंधन ने इस शर्त को हटाने पर सहमति दे दी है।

योगी ठाकुर ने बताया कि समिति ने मकान निर्माण के लिए निर्धारित 250 वर्गमीटर की शर्त को भी अव्यावहारिक बताया था। उनका कहना था कि कई परिवार पहले ही अपनी क्षमता के अनुसार मकान बना चुके हैं, जबकि कई लोगों के लिए निर्धारित मानकों के अनुरूप निर्माण संभव नहीं है। समिति ने दो या उससे अधिक मंजिला मकानों को भी इस दायरे में शामिल करने की मांग उठाई है। परियोजना प्रबंधन ने इस प्रस्ताव को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की अगली बैठक में रखने का आश्वासन दिया है।

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समिति ने हाल ही में उपायुक्त सिरमौर से भी मुलाकात कर परियोजना प्रभावित 17 पंचायतों की समस्याओं को उठाया। समिति का कहना है कि परियोजना की घोषणा के बाद से इन पंचायतों में सड़क, गलियों और अन्य विकास कार्य लगभग ठप पड़े हैं। इससे लोगों को रोजमर्रा की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। समिति ने मांग की कि परियोजना पूरी होने का इंतजार किए बिना इन क्षेत्रों में आवश्यक विकास और मरम्मत कार्य तत्काल शुरू किए जाएं। उन्होंने कहा कि सेक्शन 4 के तहत भले ही डूब क्षेत्र में निर्माण कार्य नहीं हो सकते, लेकिन मरम्मत कार्यों को अमलीजामा पहनाया जा सकता है। कोई सड़क खराब है या फिर भवन गिरने की तैयारी में है तो उसे दुरूस्त किया जाना चाहिए।

रेणुका बांध विस्थापित संघर्ष समिति
नाहन में पत्रकार वार्ता करते रेणुका बांध विस्थापित संघर्ष समिति के प्रेस सचिव योगी ठाकुर और अन्य।

पत्रकार वार्ता में योगी ठाकुर ने प्रभावित परिवारों से भी अपील की कि जिनके मामले अभी लंबित हैं या प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है, वे संघर्ष समिति से संपर्क करें। समिति ऐसे सभी परिवारों को हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि संघर्ष समिति का उद्देश्य परियोजना का विरोध करना नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों के अधिकारों की रक्षा करना है। यदि सरकार और प्रशासन संवेदनशीलता के साथ समस्याओं का समाधान करते रहे तो प्रभावित परिवार भी परियोजना के निर्माण में पूरा सहयोग देंगे। उन्होंने क्षेत्र के विधायक विनय कुमार की भी सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने प्रभावितों की मांगों को सरकार तक पहुंचाने में सकारात्मक भूमिका निभाई है।

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उन्होंने ये भी कहा कि जिन अधिवक्ताओं को रेणुकाजी डैम विस्थापितों के मामले एक भरोसे के साथ सौंपे गए थे, वे अधिवक्ता जानबूझकर मामलों को लटका रहे हैं। उन्होंने दोहराते हुए कहा कि वे विस्थापितों के दर्द को समझें और कानूनी प्रक्रियाओं में तेजी लाएं, अन्यथा विस्थापितों के तमाम दस्तावेजों के साथ उनकी फाइल वापस सौंप दें। उन्होंने कहा कि अब विस्थापितों का अगला संघर्ष जमीनों को लेकर होगा, जो उन्हें चार अलग-अलग स्थानों पर बसने के लिए दिखाई गई थी।

वहीं समिति के सलाहकार दुर्गा राम शर्मा ने परियोजना प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कुल कितनी भूमि डूब क्षेत्र में आएगी और कितनी भूमि इससे बाहर रहेगी। उन्होंने कहा कि मुआवजे का निर्धारण किस आधार पर किया जा रहा है और अब तक कितनी भूमि का भुगतान किया जा चुका है, इसकी पारदर्शी जानकारी भी सार्वजनिक नहीं की गई है। उन्होंने मांग की कि परियोजना से जुड़ी सभी जानकारियां प्रभावितों के सामने स्पष्ट रूप से रखी जाएं।

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उन्होंने मोहतू-चमियाना पुल निर्माण का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि इस पुल का प्राक्कलन पहले तैयार किया जा चुका था, लेकिन बाद में योजना आगे नहीं बढ़ सकी। यदि इस पुल का निर्माण होता है तो क्षेत्र के लोगों की करीब 25 किलोमीटर की दूरी कम होगी और आवागमन भी काफी आसान हो जाएगा। ये केंद्र सरकार की योजना है और राज्य सरकार का इससे लेना देना नहीं है। लिहाजा, इस दिशा में भी विस्थापित प्रगति चाहते हैं।

समिति ने उम्मीद जताई कि सरकार और परियोजना प्रबंधन प्रभावित परिवारों के शेष मुद्दों पर भी जल्द सकारात्मक निर्णय लेंगे। उनका कहना है कि संवाद और समाधान की यह प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ी तो इससे न केवल विस्थापित परिवारों का भरोसा मजबूत होगा, बल्कि रेणुका बांध परियोजना का रास्ता भी अधिक सुगम हो सकेगा।

Aapki Baat News Desk
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