राजगढ़ : शहीद कमनाराम राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला चंबीधार में स्थानीय ग्रामीणों, पूर्व विद्यार्थियों, समाजसेवियों और शिक्षकों ने सामूहिक एकजुटता तथा शिक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारी की एक अनूठी मिसाल पेश की है।
विद्यालय के पुराने भवन को शिक्षा विभाग द्वारा असुरक्षित घोषित किए जाने के बाद विद्यार्थियों की सुरक्षा और पढ़ाई को लेकर गंभीर संकट पैदा हो गया था। सरकारी प्रक्रिया के इंतजार में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए ग्रामीणों ने स्वयं आगे आकर नए भवन के निर्माण का बीड़ा उठाया।
स्थानीय लोगों ने अपनी क्षमता अनुसार आर्थिक योगदान दिया, वहीं विद्यालय के पूर्व विद्यार्थियों में राजमिस्त्री, पेंटर और अन्य कारीगरों ने बिना किसी पारिश्रमिक के दिन-रात श्रमदान किया। जनसहयोग और शारीरिक योगदान के बल पर मात्र दो लाख रुपये की लागत में विद्यार्थियों के लिए चार सुंदर और सुरक्षित कमरों का निर्माण पूरा कर लिया गया।

इस पूरी पहल का सबसे प्रेरणादायक पहलू इसका लोकार्पण समारोह रहा। नवरात्र के पावन अवसर पर ग्रामीणों ने किसी मंत्री, नेता या प्रशासनिक अधिकारी को मुख्य अतिथि बनाने के बजाय विद्यालय की आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली अनुसूचित जाति की अनाथ छात्रा पूजा के कर-कमलों से नए भवन का उद्घाटन करवाया।
ग्रामीणों के इस कदम ने न केवल उस मासूम बच्ची को समाज में मान-सम्मान और बराबरी का अहसास कराया, बल्कि पूरे क्षेत्र में समानता और मानवीय संवेदना का एक बड़ा संदेश भी दिया।
कार्यक्रम के दौरान समाजसेवी एवं सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी कमल दत्त शर्मा ने कहा कि ग्रामीणों और पूर्व छात्रों की सामूहिक इच्छाशक्ति ने यह साबित कर दिया है कि जनभागीदारी से शिक्षा के क्षेत्र की बड़ी से बड़ी समस्याओं का समाधान संभव है।
इस गरिमामयी अवसर पर विद्यालय की प्रधानाचार्य अंजली सूद, एसएमसी अध्यक्ष सुरेंद्र ठाकुर, पूर्व शिक्षिका मीरा शर्मा, बलदेव बड़ोठी, रूप सिंह शास्त्री, महेश शर्मा, बृजमोहन सहित समस्त विद्यालय स्टाफ और भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

