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प्राकृतिक खेती से उत्पादित गेहूं, कच्ची हल्दी और जौ की सरकारी खरीद प्रक्रिया शुरू, यहां करें आवेदन

वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में 2 लाख 8 हजार किसान प्राकृतिक खेती से जुड़े हुए हैं और करीब 37 हजार हेक्टेयर भूमि पर रसायन मुक्त खेती की जा रही है। प्राकृतिक खेती से उत्पादित गेहूं और कच्ची हल्दी की सरकारी खरीद के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है।

शिमला : प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती पद्धति से उत्पादित गेहूं और कच्ची हल्दी की सरकारी खरीद प्रक्रिया को शुरू कर रही है। इसके अलावा पांगी क्षेत्र के प्राकृतिक खेती किसान-बागवानों द्वारा उत्पादित जौ की खरीद के लिए भी फार्म भरने शुरू किए गए हैं। इसके अंतर्गत किसानों को उनकी उपज के लिए देशभर में सबसे अधिक समर्थन मूल्य प्रदान किया जाएगा।

प्राकृतिक खेती से उत्पादित गेहूं ₹60 प्रति किलोग्राम और कच्ची हल्दी ₹90 प्रति किलोग्राम की दर से खरीदी जाएगी। इस अभियान के दौरान प्राकृतिक खेती किसान गेहूं और कच्ची हल्दी के विक्रय के लिए फार्म भरकर कृषि विभाग की आतमा परियोजना के अधिकारियों के पास जमा करवा सकते हैं।

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प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना के राज्य परियोजना निदेशक हेमिस नेगी ने बताया कि विशेष अभियान के दौरान किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करने का काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह पहल किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को आर्थिक रूप से लाभदायक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में 2 लाख 8 हजार किसान प्राकृतिक खेती से जुड़े हुए हैं और करीब 37 हजार हेक्टेयर भूमि पर रसायन मुक्त खेती की जा रही है। प्राकृतिक खेती से उत्पादित गेहूं और कच्ची हल्दी की सरकारी खरीद के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है।

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इसके लिए योजना की वेबसाइट पर विक्रय के फार्म अपलोड किए गए हैं, जहां से इच्छुक किसान आवेदन पत्र डाउनलोड कर अपने विकास खंड में तैनात कृषि विभाग की आतमा परियोजना के ब्लॉक टेक्नोलॉजी मैनेजर और असिस्टेंट टेक्नोलॉजी मैनेजर के अलावा जिला परियोजना निदेशक, आतमा परियोजना से भी प्राप्त कर सकते हैं और भरने के उपरांत वहीं जमा भी करवा सकते हैं।

हेमिस नेगी ने कहा कि प्रदेश सरकार पूरे देश में प्राकृतिक खेती उत्पादों को सबसे अधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य दे रही है जिससे किसान-बागवान लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से किसान रासायनिक इनपुट पर होने वाले खर्च से मुक्त होकर उत्पादन लागत को न्यूनतम कर सकते हैं, जिससे लाभ अधिक होता है।

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साथ ही यह पद्धति मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने, जल संरक्षण करने और स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद उपलब्ध कराने में सहायक है। यह एक दीर्घकालिक, टिकाऊ और पर्यावरण हितैषी प्रणाली है जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसान समुदाय को सशक्त बनाती है।

Hitesh Sharma
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हितेश शर्मा 'आपकी बात न्यूज़ नेटवर्क' के संस्थापक और मुख्य संपादक हैं। दो दशकों से भी अधिक लंबे अपने करिअर में, वे 'अमर उजाला' 'दैनिक भास्कर' दैनिक ट्रिब्यून, पंजाब केसरी और दिव्य हिमाचल जैसे प्रमुख प्रकाशनों में महत्वपूर्ण संपादकीय जिम्मेदारियां निभाई हैं। एक अनुभवी पत्रकार और पूर्व ब्यूरो प्रमुख के तौर पर, हितेश अपनी गहन ज़मीनी रिपोर्टिंग और नैतिक व प्रभावशाली पत्रकारिता के प्रति अपने अटूट समर्पण के लिए व्यापक रूप से सम्मानित हैं। वे जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग करने में विशेषज्ञता रखते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि हर कहानी को पूरी गहराई और ज़िम्मेदारी के साथ प्रस्तुत किया जाए।

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