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एपस्टीन फाइल विवाद: दलाई लामा के कार्यालय ने आरोपों को बताया पूरी तरह झूठा

बयान में साफ किया गया कि परम पावन दलाई लामा कभी भी जेफरी एडवर्ड एपस्टीन से नहीं मिले। न ही उन्होंने किसी को एपस्टीन से मिलने या उससे बातचीत करने की अनुमति दी। कार्यालय ने इन अफवाहों को गुमराह करने वाला और मनगढ़ंत बताया।

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धर्मशाला : अमेरिका में हाल ही में जेफरी एपस्टीन से जुड़ी फाइलों के सार्वजनिक होने के बाद सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में 14वें दलाई लामा का नाम जोड़ने की कोशिश की गई, जिससे विवाद खड़ा हो गया। इन दावों पर अब दलाई लामा के कार्यालय ने सख्त और स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है।

दलाई लामा के कार्यालय ने जारी बयान में कहा कि इस तरह की रिपोर्ट्स और ऑनलाइन पोस्ट पूरी तरह झूठी और बिना किसी आधार के हैं। बयान में साफ किया गया कि परम पावन दलाई लामा कभी भी जेफरी एडवर्ड एपस्टीन से नहीं मिले। न ही उन्होंने किसी को एपस्टीन से मिलने या उससे बातचीत करने की अनुमति दी। कार्यालय ने इन अफवाहों को गुमराह करने वाला और मनगढ़ंत बताया।

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जानकारी के अनुसार अमेरिकी न्याय मंत्रालय ने हाल में एपस्टीन से जुड़े कई दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं। ये फाइलें एपस्टीन फाइल पारदर्शिता अधिनियम के तहत जारी की गई हैं, जिसे महीनों के सार्वजनिक और राजनीतिक दबाव के बाद लागू किया गया। इन दस्तावेजों में एफबीआई की 2006 से शुरू हुई जांच से जुड़े रिकॉर्ड शामिल हैं, जिनमें 30 लाख से अधिक पन्ने, 2,000 से ज्यादा वीडियो और करीब 1,80,000 तस्वीरें बताई जा रही हैं।

जेफरी एपस्टीन पर गंभीर आरोप थे। वर्ष 2019 में अभियोग लगने के एक महीने बाद न्यूयॉर्क की जेल में उनकी मौत हो गई थी। उनकी करीबी घिसलेन मैक्सवेल को 2021 में अमेरिकी अदालत ने यौन तस्करी के मामले में दोषी ठहराया। हालांकि मैक्सवेल ने नाबालिगों की भर्ती में मदद करने के आरोप स्वीकार नहीं किए, लेकिन अदालत ने उन्हें 20 साल की सजा सुनाई। वह फिलहाल जेल में हैं।

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