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चंबा में शिक्षक की विदाई पर रो पड़ा पूरा स्कूल; बिलखते बच्चों को गले लगाकर बोले मास्टर साहब- ‘मैं फिर आऊंगा बेटा’

हिमाचल प्रदेश के जिला चंबा से एक ऐसी ही तस्वीर सामने आई है, जिसने गुरू-शिष्य के पवित्र रिश्ते और निश्छल प्रेम को जीवंत कर दिया।

चंबा : गुरू और शिष्य का रिश्ता सिर्फ किताबों और पढ़ाई तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह स्नेह, विश्वास और भावनात्मक जुड़ाव की एक मजबूत नींव पर टिका होता है। हिमाचल प्रदेश के जिला चंबा से एक ऐसी ही तस्वीर सामने आई है, जिसने गुरू-शिष्य के पवित्र रिश्ते और निश्छल प्रेम को जीवंत कर दिया।

यहां चुराह क्षेत्र के मांजू प्राइमरी स्कूल में उस वक्त बेहद भावुक नजारा देखने को मिला, जब वहां कार्यरत शिक्षक नरेंद्र कुमार के तबादले पर पूरा स्कूल रो पड़ा। बच्चे तो बच्चे स्कूल स्टाफ समेत हर शख्स की आंखें भी भर आईं। स्वयं मास्टर साहब भी अपने आंसुओं को नहीं रोक पाए।

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जानकारी के अनुसार नरेंद्र कुमार ने मांजू स्कूल में करीब दो दशक तक बच्चों को शिक्षा दी। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों को पढ़ाने के साथ उनके साथ ऐसा आत्मीय रिश्ता बनाया कि उनकी विदाई बच्चों के लिए बेहद भावुक पल बन गई।

तबादले के बाद स्कूल से विदाई पर विद्यार्थियों की आंखों से आंसू छलक पड़े। बच्चों का अपने शिक्षक के प्रति यह स्नेह देखकर वहां मौजूद लोग भी भावुक हो गए। इस दौरान स्कूल का अन्य स्टाफ भी अपनी भावनाएं नहीं रोक पाया।

‘मैंने फिर से आ जाना बेटा…’
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में शिक्षक और बच्चों के बीच का आत्मीय रिश्ता साफ देखा जा सकता है। रोते-बिलखते मासूमों को गले लगाते और उनके माथे को चूमते हुए शिक्षक नरेंद्र कुमार भी खुद को संभाल नहीं पाते। वह बच्चों को दिलासा देते हुए कहते हैं कि “मैंने फिर से आ जाना बेटा…, ठीक है… तुम तो मेरी जान हो।”

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मांजू स्कूल में हुई थी पहली नियुक्ति
शिक्षक नरेंद्र कुमार की पहली नियुक्ति प्राइमरी स्कूल मांजू में हुई थी। तब से वह इसी स्कूल में सेवाएं दे रहे थे। लंबे समय तक एक ही स्कूल में रहने के कारण उन्होंने अपनी विलिंग देकर जसोरगढ़ प्राइमरी स्कूल में ट्रांसफर करवाई।

यह बात मांजू स्कूल के बच्चों को अच्छी नहीं लगी। नरेंद्र ने बताया कि बच्चों की भावनाओं को देखते हुए वह नए शैक्षणिक सत्र से दोबारा मांजू स्कूल में अपना ट्रांसफर करवाने की कोशिश करेंगे।

कुल मिलाकर बच्चों की भावुक प्रतिक्रिया इस बात का प्रमाण बनी कि शिक्षक ने उनके जीवन में केवल पढ़ाई तक सीमित न रहकर एक खास जगह बनाई थी।

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Aapki Baat News Desk
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