भावानगर : किन्नौर की पहाड़ियों में अब एक ऐसी सड़क आकार लेने जा रही है, जिसका सफर सिर्फ किलोमीटर में लंबा नहीं, बल्कि भौगोलिक चुनौतियों के लिहाज से भी खास है।
चौरा (निगुलसरी) से मझगांव तक बनने वाली 24.400 किलोमीटर लंबी सड़क रूपी वैली को सीधे एनएच-05 से जोड़ेगी। पीएमजीएसवाई-4 के प्रथम चरण में शिमला जोन को मिली परियोजनाओं में इसे सबसे लंबी और दुर्गम क्षेत्र की सड़क बताया जा रहा है।
करीब 20 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना में कच्चे रास्ते को पक्की सड़क में बदलने से कहीं आगे की तैयारी है। पहाड़ी ढलानों पर सफर को सुरक्षित बनाने के लिए 1319 पैरापिट बनाए जाएंगे।
रास्ते में 40 पुलिया और 12 कलवर्ट बनेंगे, जबकि बारिश के पानी की निकासी के लिए 3624 मीटर लंबी वी-आकार की नालियां तैयार की जाएंगी। सड़क का चौड़ीकरण, टारिंग और डंगों का निर्माण भी परियोजना का हिस्सा है।
24 किलोमीटर का रास्ता, पहाड़ की हर चुनौती का इंतजाम
किन्नौर में सड़क बनाना मैदानी क्षेत्र की तरह सीधा काम नहीं है। कहीं खड़ी पहाड़ी ढलान है तो कहीं गहरी घाटियां। बारिश में पानी का बहाव और सर्दियों में बर्फबारी सड़क की चुनौती बढ़ा देती है। इसी वजह से इस परियोजना में पुलियों, कलवर्ट, पैरापिट और जल निकासी को खास महत्व दिया गया है।
फिलहाल, चौरा से मझगांव तक का मार्ग कच्चा है। निर्माण पूरा होने के बाद रूपी वैली के ग्रामीणों को सीधे एनएच-05 से जुड़ने वाला बेहतर मार्ग मिलेगा। दो पंचायतों के सैकड़ों लोगों के लिए यह सड़क रोजमर्रा की आवाजाही के साथ स्वास्थ्य, शिक्षा, बाजार और अपनी उपज को बाहर पहुंचाने का रास्ता भी आसान करेगी।
किन्नौर के गांवों से बाजार तक घटेगी दूरी की मुश्किल
किन्नौर की अर्थव्यवस्था में बागवानी और कृषि की अहम भूमिका है। पहाड़ों में पैदा होने वाली उपज को बाजार तक पहुंचाने के लिए सड़क सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे में कच्चे और दुर्गम रास्ते की जगह बेहतर सड़क मिलने का असर केवल यात्रियों पर नहीं, बल्कि गांवों की आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है।
यह इलाका अपनी सड़क के साथ किन्नौर की विशिष्ट जनजातीय पहचान से भी जुड़ा है। पारंपरिक मेलों-त्योहारों, स्थानीय वेशभूषा, खान-पान और पहाड़ी जीवनशैली के बीच बसे गांवों के लिए सड़क संपर्क बाहरी दुनिया तक पहुंच का माध्यम है। बेहतर सड़क से इन गांवों का जिला मुख्यालय और राष्ट्रीय राजमार्ग से संपर्क और सुगम होगा।
2028 तक पूरा करने का लक्ष्य
लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता विजय कुमार चौधरी ने बताया कि सड़क निर्माण को वर्ष 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि यह शिमला जोन में पीएमजीएसवाई-4 के प्रथम चरण में अवार्ड हुई सड़कों में सबसे लंबी और दुर्गम क्षेत्र की सड़क है। निर्माण कार्य विभाग की निगरानी में चल रहा है और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
परियोजना का टेंडर एसएस एसोसिएट्स को अवार्ड हुआ है। सड़क निर्माण कार्य के लिए संजय सिंघल को ठेका दिया गया है।
कुल मिलाकर चौरा से मझगांव तक यह सड़क पूरी होने के बाद रूपी वैली के लिए सबसे बड़ा बदलाव केवल सड़क के पक्का होने का नहीं होगा। असल बदलाव यह होगा कि दुर्गम पहाड़ी गांवों से निकलने वाला यह रास्ता सीधे एनएच-05 से जुड़ जाएगा और किन्नौर की पहाड़ियों में 24.4 किलोमीटर का यह सफर पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा सुरक्षित और सुगम हो सकेगा।
