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CM सुक्खू बोले- मुझे 70 हजार करोड़ रुपये मिलते, तो आज हिमाचल कर्ज मुक्त होता

सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में कभी भी पुरानी पेंशन स्कीम बंद नहीं होगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने पहली ही कैबिनेट में ओपीएस दी और यह किसी भी राजनीतिक मंशा से नहीं किया है।

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मंडी : मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शुक्रवार को जिला मंडी के नाचन विधानसभा क्षेत्र के दियारगी में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए छातर में राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल खोलने की घोषणा की। उन्होंने हिमाचल प्रदेश एससी-एसटी आयोग के अध्यक्ष लाल सिंह कौशल और कांग्रेस नेता नरेश चौहान की हर मांग को पूरा करने की घोषणा भी की। उन्होंने जनसभा में उपस्थित सभी महिला मंडलों को 51-51 हजार रुपये देने की भी घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 16वें वित्तायोग ने हिमाचल प्रदेश के लोगों के अधिकार को राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) के रूप में मिलने वाले 10 हजार करोड़ रुपये को बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि पिछली भाजपा सरकार को पांच वर्षों में 54 हजार करोड़ रुपये आरडीजी और 16 हजार करोड़ रुपये जीएसटी प्रतिपूर्ति के रूप में मिले। उन्होंने कहा कि अगर पूर्व मुख्यमंत्री ने वित्तीय अनुशासन रखा होता तो 30 हजार करोड़ रुपये कर्ज कम हो सकता था। पूरे प्रदेश में एक हजार करोड़ रुपये के भवन बना दिए, जो आज खाली पड़े हैं।

वर्तमान सरकार को 17 हजार करोड़ रुपये आरडीजी के रूप में मिला और अब अगले वित्त वर्ष से वह भी बंद हो गया है। फिर भी हमने 14 प्रतिशत डीए और सत्तर वर्ष से अधिक आयु वर्ग के पेंशनरों के एरियर भुगतान किया है। अगर मुझे इतना पैसा मिला होता, तो आज हिमाचल प्रदेश कर्ज मुक्त होता।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला मंडी ने भाजपा को नौ सीटें दी, पिछली भाजपा सरकार में मुख्यमंत्री भी मंडी जिला से थे, लेकिन मेडिकल कॉलेज नेरचौक के हाल भी बदतर थे। उन्होंने कहा कि आज से हमने नेरचौक में रोबोटिक सर्जरी की शुरूआत कर दी है। उन्होंने कहा, ‘प्राइवेट अस्पताल में यह ऑपरेशन पांच लाख से होता है, जबकि हिमाचल प्रदेश के मेडिकल कॉलेज में यह ऑपरेशन 50 हजार रुपये में होगा। नेरचौक में कैथ लैब स्थापित करने के लिए 12 करोड़ रुपये दिए।’

सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में कभी भी पुरानी पेंशन स्कीम बंद नहीं होगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने पहली ही कैबिनेट में ओपीएस दी और यह किसी भी राजनीतिक मंशा से नहीं किया है। उन्होंने कहा कि वह स्वयं एक सरकारी कर्मचारी के बेटे हैं और किसी भी कीमत पर पुरानी पेंशन को बंद नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों का हित सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार एरियर भी देगी और हर चुनौती का सामना करेंगे।

उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचारियों की सूची तैयार की जाएगी और जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। चिट्टे के कारोबार में संलिप्त कोई भी व्यक्ति नहीं बचेगा, कर्मचारी बर्खास्त होंगे और चिट्टा तस्करों की संपत्ति नेस्तनाबूद कर दी जाएगी।

भाजपा को हिमाचल विरोधी करार देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में आपदा के दौरान भाजपा बार-बार विधानसभा सत्र बुलाने की मांग करते थे, जबकि पूरी कांग्रेस सरकार प्रभावित परिवारों की मदद में जुटी थी। लेकिन जब हिमाचल प्रदेश को केंद्र सरकार से विशेष राहत पैकेज दिलाने का प्रस्ताव आया तो भाजपा विधायक नारे लगाते हुए विधानसभा से बाहर चले गए। उन्होंने कहा कि मैं आम आदमी का दर्द जानता हूं। इसलिए आपदा प्रभावितों की मदद के लिए नियमों में संशोधन कर आशातीत वृद्धि की। वर्ष 2023 में पूरा घर नष्ट होने पर सात लाख रुपये दिए गए, जबकि इस वर्ष 8 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी। आरडीजी पर भी राज्य सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई, लेकिन वहां भी हिमाचल के अधिकारों के लिए भाजपा साथ नहीं खड़ी हुई।

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उन्होंने कहा कि अगर हिमाचल प्रदेश को उसके अधिकार दे दिए जाएं तो हमें किसी से कुछ भी मांगने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा आज पांच गुटों में बंटी है। उन्होंने कहा कि नाचन के विधायक विनोद कुमार को भी भाजपा के बाकी चार गुटों से खतरा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब विद्यार्थियों की सुरक्षा को देखते हुए सरकार ने आपदा में प्रभावित हॉर्टिकल्चर कॉलेज थुनाग को चैलचौक शिफ्ट करने की बात की तो नेता विपक्ष ने नाचन का विरोध किया। उन्होंने कहा ‘जयराम जी तब मंडी भूल गए और उन्हें सिराज याद आ गया।’

सुक्खू ने कहा कि पिछली भाजपा सरकार ने चुनावी लाभ के लिए 5000 करोड़ रुपये की रेवड़ियां बांट दी। चुनाव से छह महीने पहले पूरे प्रदेश में अनेकों संस्थान खोल दिए। स्कूलों और स्वास्थ्य संस्थानों को स्तरोन्नत किया गया, जिसके लिए स्टाफ का कोई प्रावधान नहीं किया गया। दूसरे संस्थान से स्टाफ ट्रांसफर किए गए जिससे दोनों संस्थानों के शिक्षा स्तर में गिरावट आई। उन्होंने कहा कि पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल में गुणात्मक शिक्षा के मामले में राज्य देश भर में 21वें स्थान पर पहुंच गया। भाजपा सरकार के कार्यकाल में शिक्षकों की भर्ती नहीं हुई। उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने रिक्त पदों को भरा और आज हिमाचल प्रदेश गुणात्मक शिक्षा के मामले में 5वें स्थान पर पहुंच गया है।

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उन्होंने कहा ‘सरकारी स्कूलों के बच्चे भी सीबीएसई पाठ्यक्रम पढ़ना चाहते हैं। इसीलिए हमने प्रदेश में सीबीएसई स्कूल खोलने की शुरूआत की है। उन्होंने नाचन के तीन स्कूलों को सीबीएसई पाठ्यक्रम पर आधारित बनाने की घोषणा की। कहा, तीन महीने में तीन हजार अध्यापकों की भर्ती सीबीएसई अध्यापकों की भर्ती की जाएगी।’