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हिमाचल में ड्रग जांच होगी और तेज: बद्दी, ऊना और नूरपुर में खुलेंगी 3 समर्पित टेस्टिंग प्रयोगशालाएं

इन प्रयोगशालाओं के स्थापित होने से मादक पदार्थों के सेवन की जांच के लिए जैविक नमूनों का त्वरित एवं वैज्ञानिक विश्लेषण संभव होगा।

शिमला : हिमाचल प्रदेश के निदेशालय फॉरेंसिक सेवाएं जुन्गा में ड्रग विश्लेषण विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य न्यायालयिक ड्रग परीक्षण के क्षेत्र में वैज्ञानिक क्षमताओं को सुदृढ़ करना और राज्य की सभी न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशालाओं में मादक पदार्थों के विश्लेषण के लिए एक समान वैज्ञानिक मानकों का विकास करना है।

कार्यशाला का शुभारंभ डॉ. मीनाक्षी महाजन, निदेशक, फॉरेंसिक सेवाएं ने कहा कि यह कार्यशाला मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू द्वारा 7वीं राष्ट्रीय नारकोटिक्स समन्वय बैठक के दौरान दिए गए निर्देशों के अनुपालन में आयोजित की गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बढ़ती नशे की समस्या से प्रभावी रूप से निपटने के लिए वैज्ञानिक एवं साक्ष्य-आधारित जांच प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ करना आवश्यक है।

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डॉ. महाजन ने कहा कि न्यायालयिक विज्ञान कानून प्रवर्तन एजेंसियों एवं आपराधिक न्याय प्रणाली को सटीक, विश्वसनीय और न्यायालय में स्वीकार्य वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने न्यायालयिक विष विज्ञान के क्षेत्र में मानकीकृत प्रक्रियाओं को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि प्रयोगशाला परीक्षण एवं रिपोर्टिंग में गुणवत्ता, एकरूपता और विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके।

कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने बद्दी, ऊना और नूरपुर में तीन समर्पित ड्रग टेस्टिंग प्रयोगशालाओं की स्थापना को स्वीकृति प्रदान की है। इन प्रयोगशालाओं के स्थापित होने से मादक पदार्थों के सेवन की जांच के लिए जैविक नमूनों का त्वरित एवं वैज्ञानिक विश्लेषण संभव होगा।

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कार्यशाला के मुख्य तकनीकी वक्ता डॉ. एके जायसवाल, वैज्ञानिक-सह-वरिष्ठ रसायनज्ञ, फॉरेंसिक चिकित्सा एवं विष विज्ञान विभाग, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली रहे। उन्होंने फॉरेंसिक ड्रग विश्लेषण के क्षेत्र में नवीनतम वैज्ञानिक प्रगति, आधुनिक विश्लेषणात्मक तकनीकों, गुणवत्ता नियंत्रण उपायों तथा प्रयोगशाला की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों पर अपने विशेषज्ञ विचार साझा किए।

इस कार्यशाला में राज्य फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला, जुन्गा, क्षेत्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला, उत्तरी परिक्षेत्र, धर्मशाला, तथा क्षेत्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला, मध्य परिक्षेत्र, मंडी के फॉरेंसिक विशेषज्ञों एवं वैज्ञानिक अधिकारियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। कार्यशाला में जैविक नमूनों एवं बिसरा में मादक पदार्थों, मनरूप्रभावी पदार्थों, विषों तथा उनके मेटाबोलाइट्स के गुणात्मक एवं मात्रात्मक विश्लेषण हेतु एक समान मानक संचालन प्रक्रिया विकसित करने पर विस्तृत चर्चा की गई।

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प्रवक्ता डॉ. एसके पाल ने बताया कि निदेशालय फॉरेंसिक वैज्ञानिकों की व्यावसायिक दक्षता को निरंतर बढ़ाने, प्रयोगशाला अवसंरचना को सुदृढ़ करने तथा वैश्विक स्तर पर स्वीकृत वैज्ञानिक मानकों को अपनाने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि कानून प्रवर्तन एजेंसियों एवं न्याय प्रणाली को उच्च गुणवत्ता वाली फॉरेंसिक सेवाएं उपलब्ध करवाई जा सकें।

Aapki Baat News Desk
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