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स्टाफ की कमी से जूझ रहा जल शक्ति विभाग कोटी, एक जेई के कंधे पर 80 पेयजल और सिंचाई योजनाओं का जिम्मा

उपमंडल की सीमाएं जहां सिरमौर जिला के राजगढ़ उपमंडल को छूती हैं, वहीं दूसरी ओर इसकी सीमाएं ठियोग के साथ भेखलटी के साथ लगती हैं। समूचा उपमंडल करीब 60 से 70 किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला हुआ है। इस उपमंडल के अतंर्गत कुल 18 ग्राम पंचायतें आती हैं, जिनमें से छः पंचायतें ठियोग ब्लॉक की शामिल हैं।

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शिमला : आमजन को पेयजल उपलब्ध करवाने वाला जल शक्ति विभाग का कोटी उपमंडल कार्यालय काफी अरसे से स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। इस उपमंडल में कनिष्ठ अभियंता सहित विभिन्न श्रेणियों के 16 पद रिक्त पड़े हैं। उपमंडल की सीमाएं जहां सिरमौर जिला के राजगढ़ उपमंडल को छूती हैं, वहीं दूसरी ओर इसकी सीमाएं ठियोग के साथ भेखलटी के साथ लगती हैं। समूचा उपमंडल करीब 60 से 70 किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला हुआ है। इस उपमंडल के अतंर्गत कुल 18 ग्राम पंचायतें आती हैं, जिनमें से छः पंचायतें ठियोग ब्लॉक की शामिल हैं।

गौर रहे कि वर्तमान में जल शाक्ति विभाग कोटी के अधीन आने वाली इन 18 पंचायतों में 80 से अधिक पेयजल और सिंचाई योजनाएं हैं, जिनका कार्यभार केवल एक कनिष्ठ अभियंता के कंधे पर है। आलम यह है कि उपमंडल कोटी के अतंर्गत आने वाले चार अनुभाग में केवल एक जेई कार्यरत है। बाकि कनिष्ठ अभियंताओं के तीन पद रिक्त पड़े हैं। एक माह पहले कोटी उपमंडल के जेई सुनील भिक्टा के पास कुल सात सेक्शन का कार्यभार था, जिसमें तीन सेक्शन कसुपंटी उपमंडल के शामिल थे।

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इस उपमंडल में करीब छः माह से सहायक अभियंता का पद रिक्त चल रहा था। दो दिन पहले नए सहायक अभियंता ने अपना पदभार संभाला है। इसके अतिरिक्त सर्वेयर, वर्क इंस्पेक्टर, फीटर, पंप ऑपरेटर और लिपिक वर्गीय में वरिष्ठ सहायक, कनिष्ठ सहायक के पद भी रिक्त पड़े हैं। पंप ऑपरेटर का कार्य बेलदार से लिया जा रहा है।

जुन्गा क्षेत्र के अनेक बुद्धिजीवी लोगों का कहना है कि कोटी का जल शक्ति विभाग रामभरोसे चल रहा है। इनका कहना है कि जुन्गा तहसील की कई ग्राम पंचायतों में राजनीतिक दबाव के चलते जरूरत से ज्यादा जल रक्षक तैनात किए गए हैं, जिनमें से कुछ जल रक्षकों के पास कोई काम नहीं बांटा गया है और उन्हें बिना किसी कार्य के मानदेय दिया जा रहा है, जिसके लिए विभाग द्वारा युक्तिकरण के फार्मूले की नीति को नहीं अपनाया गया है। जब इस बारे विभाग के उच्चाधिकारियों से बात की गई तो जवाब मिला कि रिक्त पदों का ब्यौरा हर माह सरकार को भेजा जाता है और खाली पद भरना सरकार के विशेष अधिकार क्षेत्र में आता है।

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