शिमला : हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि वह स्वास्थ्य संस्थानों को आयुष्मान भारत व हिमकेयर योजना के तहत प्रदान की गई सेवाओं के बिलों का भुगतान 10 अप्रैल से पहले जारी करे। कोर्ट ने राज्य सरकार सहित प्रतिवादियों को आदेश दिए हैं कि वह याचिकाकर्ता अस्पतालों के सभी लंबित स्वीकृत बिलों का भुगतान करें। ऐसा न करने पर प्रतिवादियों को अगली तारीख पर न्यायालय में उपस्थित रहने के आदेश दिए गए हैं, ताकि कानून के अनुसार उनके खिलाफ उचित आदेश पारित किया जा सके।
न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ ने विभिन्न निजी अस्पतालों द्वारा दायर याचिकाओं की सुनवाई के बाद यह अंतरिम आदेश जारी किए हैं। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं द्वारा प्रदान की जा रही सेवाएं प्रकृति में निरंतर हैं। जैसे-जैसे और अधिक रोगियों की देखभाल की जाएगी, ये दावे हर गुजरते दिन के साथ बढ़ते जाएंगे।
राज्य सरकार जो संवैधानिक सिद्धांतों के प्रति समर्पित एक कल्याणकारी संस्था है, का यह मौलिक दायित्व है कि वह अपनी प्रतिबद्धता का सम्मान करे और वैध दावों को अस्वीकार न करे, जिससे याचिकाकर्ताओं को अपने हक के लिए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करने पर मजबूर होना पड़े।
उस नीति की पृष्ठभूमि में जिसके तहत राज्य सरकार ने याचिकाकर्ताओं के साथ अनुबंध किए थे और कार्य पूरा हो भी चुका है और बिल भी स्वीकृत हो चुके हैं। इन परिस्थितियों में राज्य व केंद्र सरकार याचिकाकर्ताओं के स्वीकृत बिलों का भुगतान रोक नहीं सकती है।



