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वीबी-जी राम जी योजना से हिमाचल के गांवों को मिलेगा नया जीवन, 125 दिन की रोजगार गारंटी से बदलेगी तस्वीर : डॉ. बिंदल

डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि मनरेगा वर्ष 2005 से 2025 तक चली, लेकिन बदलती सामाजिक–आर्थिक परिस्थितियों, अनुभवों और जमीनी कमियों को देखते हुए एक नई, अधिक प्रभावी और विकास–आधारित योजना की आवश्यकता महसूस हुई, जिसके परिणामस्वरूप वीबी–जी राम जी अधिनियम अस्तित्व में आया।

शिमला : भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि केंद्र की एनडीए सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशव्यापी स्तर पर एक अत्यंत दूरदर्शी और समयानुकूल योजना का शुभारंभ किया है। हाल ही में संसद के शीतकालीन सत्र में पारित विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)– वीबी–जी राम जी विधेयक, 2025 ग्रामीण भारत के लिए एक नया आयाम स्थापित करेगा। यह योजना केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजगार को ग्रामीण विकास से जोड़ने की एक ठोस और परिणामोन्मुखी व्यवस्था है।

मीडिया से बातचीत करते हुए बिंदल ने कहा कि भारत की आजादी के बाद समय–समय पर विभिन्न सरकारों ने ग्रामीण रोजगार की दिशा में योजनाएं चलाईं। वर्ष 1960–61 में रूरल मैनपावर प्रोग्राम से लेकर 2005 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) तक अनेक योजनाएं लागू की गईं। मनरेगा वर्ष 2005 से 2025 तक चली, लेकिन बदलती सामाजिक–आर्थिक परिस्थितियों, अनुभवों और जमीनी कमियों को देखते हुए एक नई, अधिक प्रभावी और विकास–आधारित योजना की आवश्यकता महसूस हुई, जिसके परिणामस्वरूप वीबी–जी राम जी अधिनियम अस्तित्व में आया।

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उन्होंने स्पष्ट किया कि मनरेगा में 100 दिन की रोजगार गारंटी थी, लेकिन वास्तविकता यह रही कि औसतन केवल 50.4 दिन का ही रोजगार सृजन हो पाया। इसके विपरीत वीबी–जी राम जी योजना में 125 दिन की कानूनी गारंटी दी गई है, जो विकास परियोजनाओं से जुड़ी होगी। इस योजना के अंतर्गत ग्राम सभा स्तर पर गांव का विकास प्लान तैयार होगा, जो ब्लॉक और जिला स्तर से होते हुए पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म से जुड़ेगा। उसी विकास प्लान के क्रियान्वयन के लिए रोजगार सृजित किया जाएगा, जिससे गांव का समग्र विकास सुनिश्चित होगा।

इस योजना का एक बड़ा लाभ यह है कि यह पूरी तरह टेक्नोलॉजी आधारित है। बायोमेट्रिक उपस्थिति, डिजिटल मल्टी–लेवल मॉनिटरिंग, छह माह में समीक्षा और टाइम–बाउंड पेमेंट का स्पष्ट प्रावधान इसमें शामिल है। यदि समय पर रोजगार या भुगतान नहीं होता है, तो संबंधित व्यक्ति को मुआवजे का भी प्रावधान किया गया है, जिससे जवाबदेही तय होगी। फंडिंग पैटर्न को लेकर भी कांग्रेस भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है, जबकि सच्चाई यह है कि हिमालयी राज्यों जैसे हिमाचल प्रदेश के लिए केंद्र और राज्य का अनुपात 90:10 रखा गया है, जो प्रदेश के लिए अत्यंत लाभकारी है। अन्य राज्यों में यह अनुपात 60:40 है। केंद्र सरकार ने राज्यों की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था की है।

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बिंदल ने आंकड़े रखते हुए कहा कि कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने वर्ष 2006 से 2014 तक मनरेगा पर ₹2.13 लाख करोड़ खर्च किए, जबकि एनडीए सरकार ने 2014 से 2025 तक ₹8.53 लाख करोड़ से अधिक खर्च कर दिए। रोजगार सृजन के मामले में भी यूपीए सरकार के दौरान 1660 मिलियन मंडेज, जबकि मोदी सरकार के दौरान 3210 मिलियन मंडेज सृजित हुए। पूर्ण कार्यों की संख्या यूपीए काल में 153 लाख, जबकि एनडीए काल में 862 लाख रही, जो भाजपा सरकार की गंभीरता को दर्शाता है।

हिमाचल प्रदेश का उदाहरण देते हुए बिंदल ने कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान प्रदेश में 16.52 लाख मंडेज, जबकि मोदी सरकार के समय 32.6 लाख मंडेज सृजित हुए, यानी दोगुना रोजगार मिला। वीबी–जी राम जी योजना के तहत लगभग ₹1.5 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो पहले की तुलना में कहीं अधिक है।

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उन्होंने कहा कि यह योजना चार प्रमुख क्षेत्रों- ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर, जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आजीविका पर केंद्रित है। प्रशासनिक व्यय को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत किया गया है, ताकि योजना का बेहतर क्रियान्वयन, ऑडिट और निगरानी हो सके। कांग्रेस केवल नाम बदलने का मुद्दा उठाकर जनता को गुमराह कर रही है, जबकि इतिहास गवाह है कि कांग्रेस सरकारों ने स्वयं समय–समय पर योजनाओं के नाम बदले हैं। भाजपा ने कभी इसका विरोध नहीं किया। असली मुद्दा नाम नहीं, बल्कि परिणाम और विकास है।

Hitesh Sharma
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हितेश शर्मा 'आपकी बात न्यूज़ नेटवर्क' के संस्थापक और मुख्य संपादक हैं। दो दशकों से भी अधिक लंबे अपने करिअर में, वे 'अमर उजाला' 'दैनिक भास्कर' दैनिक ट्रिब्यून, पंजाब केसरी और दिव्य हिमाचल जैसे प्रमुख प्रकाशनों में महत्वपूर्ण संपादकीय जिम्मेदारियां निभाई हैं। एक अनुभवी पत्रकार और पूर्व ब्यूरो प्रमुख के तौर पर, हितेश अपनी गहन ज़मीनी रिपोर्टिंग और नैतिक व प्रभावशाली पत्रकारिता के प्रति अपने अटूट समर्पण के लिए व्यापक रूप से सम्मानित हैं। वे जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग करने में विशेषज्ञता रखते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि हर कहानी को पूरी गहराई और ज़िम्मेदारी के साथ प्रस्तुत किया जाए।

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