मंडी/नाहन : हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी के सराज विधानसभा क्षेत्र के एक गांव में अनुसूचित जाति के नाबालिग बच्चों के साथ कथित मारपीट और जातीय भेदभाव के मामले को लेकर शोषण मुक्ति मंच ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
मंच ने कहा कि यदि घटना सही है तो यह मानवता, संविधान और सामाजिक न्याय पर सीधा हमला है। संगठन ने दोषियों के खिलाफ एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत तत्काल उचित कार्रवाई की मांग की है।
शोषण मुक्ति मंच के राज्य संयोजक आशीष कुमार, मिंटा जिंटा, राजेश कोष, जगत राम, विवेक कश्यप, राजेश तोमर और मान सिंह ने संयुक्त बयान में कहा कि पीड़ित पिता सुंदर सिंह के अनुसार उनके नाबालिग बच्चे सफेद मोतिया की बीमारी से पीड़ित हैं। इसके बावजूद उनके साथ लंबे समय से जातिगत भेदभाव किया जा रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि 17 जुलाई को बच्चों को स्कूल में बंद रखा गया, उनके साथ मारपीट की गई और परिवार को जान से मारने की धमकी दी गई।
मंच के नेताओं ने कहा कि यदि हिमाचल प्रदेश में दलित बच्चे स्कूलों के भीतर भी सुरक्षित नहीं हैं तो यह कानून-व्यवस्था और प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। उनका कहना है कि शिक्षा का मंदिर यदि जातीय घृणा का केंद्र बन जाए तो यह पूरे समाज के लिए चिंता का विषय है और दोषियों को किसी भी प्रकार का राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।
शोषण मुक्ति मंच ने मांग की है कि मामले में एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की सभी प्रासंगिक धाराओं के तहत तत्काल एफआईआर दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए। साथ ही पीड़ित परिवार को सुरक्षा, बच्चों को न्याय और उचित उपचार उपलब्ध कराया जाए तथा निष्पक्ष जांच के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
मंच ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों के खिलाफ शीघ्र और प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो वह पूरे प्रदेश में लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन शुरू करेगा।
