राजगढ़ : शिक्षक दिवस के अवसर पर संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित प्रदेश के सुप्रसिद्ध संगीतज्ञ एवं कलाकार पंडित डॉ. कृष्णलाल सहगल के सम्मान में उनके शिष्यों द्वारा विशेष गुरु सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
समारोह में शिष्यों ने शास्त्रीय एवं सुगम संगीत, गजल, भजन और हिमाचली लोकगीतों व नाटियों की शानदार प्रस्तुतियां देकर ऐसा समां बांधा कि उपस्थित लोग देर तक मधुर संगीत की लहरियों में डूबे रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ स्वयं डॉ. कृष्णलाल सहगल ने दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद शिष्यों ने “जय जय है भगवती सुरभारती” सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर कार्यक्रम का विधिवत आगाज किया। पीयूष दस्सन ने “गुरु बिन कौन बतावे बात” गुरु वंदना प्रस्तुत कर गुरु-शिष्य परंपरा को नमन किया।
डॉ. सविता सहगल ने राग भूपाली में “जबसे तुम संग लाग ली” की प्रस्तुति दी। उन्होंने मध्यम, द्रुत और तराना के माध्यम से शास्त्रीय संगीत की बारीकियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। सारंग गंधर्व ने तबला वादन से अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम में गजलों का दौर भी शुरू हुआ। जतिन ने “यूँ जरा सी बात पर बरसों के याराने गए” प्रस्तुत कर वाहवाही लूटी। सृष्टि गंधर्व ने बशीर बद्र की गजल “वो नहीं मिला तो मलाल क्या” पेश की। वहीं डॉ. विनोद गंधर्व ने शमीम जयपुरी की गजल “दिल लगाने की किसी से वो सजा पाई के बस” तथा जाँ निसार अख्तर की गजल “हमने काटी है तेरी याद में रातें अक्सर” प्रस्तुत कर खूब सराहना बटोरी।
इस अवसर पर डॉ. कृष्णलाल सहगल की ऑडियो ‘मरची-2’ का विमोचन भी किया गया। राजेंद्र चौहान ने “जिंदगी के मरहले आसान होते जा रहे” तथा “जिधर जाते हैं सब, जाना उधर अच्छा नहीं लगता” प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर किया।
अरुण व नरेश ठाकुर ने “राम तजो गुरु को न बिसारो” तथा पहाड़ी भजन “तेरी महिमा र गुण गाना” प्रस्तुत किए। युवा शर्मा ने कबीर का भजन “साधो सो सतगुरु मोहे भावे” सुनाकर आध्यात्मिक वातावरण बनाया। सार्थक बरशांटा ने ढोल वादन की बेहतरीन प्रस्तुति दी।
रोहित ठाकुर ने अपनी बुलंद और मधुर आवाज में “किन्दे मरचिये, चाले बे दाड़िये” प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरीं। वहीं ओमप्रकाश गर्ग और भारती ने “मेरे नई शावरे जाणा बापुया” की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। इस प्रस्तुति से डॉ. कृष्णलाल सहगल भावुक हो गए और उनकी आंखें नम हो गईं।
सुमन सोनी ने “रोयो रात कोटि मेरी” तथा सुरेश जोगटा ने “घोणी केल्टी बिल्डे बाणों” प्रस्तुत कर लोक संस्कृति की खूबसूरत झलक पेश की। इसकंे बाद नॉन-स्टॉप नाटियों का दौर चला। इस दौरान रविंद्र वर्मा ने शानदार नृत्य कर माहौल को पूरी तरह उत्सवमय बना दिया और उपस्थित लोगों को भी नृत्य के लिए अपने साथ जोड़ लिया।
समारोह में सम्मान से अभिभूत डॉ. कृष्णलाल सहगल ने अपने शिष्यों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अपने शिष्यों से मिला यह सम्मान उनके जीवन के सबसे सुंदर और सुखद पलों में से एक है तथा यह उनके लिए किसी भी पुरस्कार से अधिक महत्वपूर्ण है।
उन्होंने समारोह में उपस्थित लोगों का भी आभार जताया और शिष्यों को सलाह दी कि वे अपने मान-सम्मान का ध्यान रखते हुए निरंतर संगीत साधना में आगे बढ़ते रहें।
डॉ. सहगल ने कलाकारों के सम्मान से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर चिंता जताते हुए कहा कि प्रदेशभर में मेलों और समारोहों के दौरान कई बार कलाकारों को दो मिनट बाद ही मंच से हटाने या माइक बंद करने की स्थिति पैदा कर दी जाती है।
उन्होंने कहा कि यह कलाकार का सम्मान नहीं, बल्कि उसका अपमान है। उन्होंने आयोजकों से इस तरह की परंपरा को बंद करने तथा कलाकारों को उनकी प्रस्तुति के लिए उचित समय और सम्मान देने की अपील की। कार्यक्रम का सफल संचालन जगदीश शर्मा ने अपनी प्रभावशाली शैली में किया, जबकि रविंद्र वर्मा ने भी उनका भरपूर सहयोग दिया।
कार्यक्रम में पझौता स्वतंत्रता संग्राम परिवार कल्याण समिति के अध्यक्ष जयप्रकाश चौहान, पूर्व जिप सदस्य शकुंतला प्रकाश, सावित्री ठाकुर, वेद प्रकाश ठाकुर, दिनेश आर्य, नीरज ठाकुर सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों ने सांस्कृतिक संध्या का भरपूर आन्नद लिया।
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