शिलाई : जिला सिरमौर के शिलाई विधानसभा क्षेत्र के कफोटा में सरकारी भूमि पर कथित अवैध कब्जे का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है।
वर्ष 1994 से सितंबर 2026 तक हुई अलग-अलग निशानदेहियों, राजस्व विभाग की रिपोर्टों, जुर्माने और उच्च न्यायालय के आदेशों के बावजूद मामला सुलझ नहीं पाया है।
हाल ही में 21 सितंबर 2026 को हुई ताजा निशानदेही में कथित छेड़छाड़ के आरोपों ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
एसडीएम कफोटा को सौंपी गई शिकायत में ग्रामीणों जगदीश कुमार, धनीराम, सचिन, गुलाब सिंह, जगमोहन सिंह, सुरेश कुमार, नितीश, रंगीलाल, कमलेश, रतीराम, संदीप चौहान, कपिल पुंडीर, दिनेश कुमार व मुंशीराम ने बताया कि इस मामले में पहली निशानदेही 14 जून 1994 को तत्कालीन कानूनगो ने की थी।
उस दौरान नौ बिस्वा भूमि का ततिमा मौके पर काटा गया था। बताया गया है कि तत्कालीन तहसीलदार ने भी मुहर लगाकर संबंधित स्थान को चिह्नित किया था।
इसके बाद 29 दिसंबर 2022 को तत्कालीन संबंधित कानूनगो द्वारा दोबारा निशानदेही की गई, जिसमें संबंधित खातेदारों के हिस्सों की पहचान करते हुए मौके का ततिमा तैयार किया गया।
इसके बाद मामले में अगली महत्वपूर्ण कार्रवाई 30 नवंबर 2024 को हुई, जब उच्च न्यायालय के आदेशों के तहत तत्कालीन संबंधित कानूनगो सुरेश कुमार ने निशानदेही की। इसमें भूमि मालिकों के हिस्सों की पहचान करने के साथ खसरा नंबर 626 की शामलात भूमि तथा खसरा नंबर 627 के बंदोबस्ती रास्ते को भी चिह्नित किया गया।
आरोप है कि संबंधित भूमि और रास्ते पर अतिक्रमण किया गया है। इसी मामले में 2024 को तहसीलदार द्वारा अवैध निर्माण वाले मकान को कब्जे में लेने व पुलिस थाना शिलाई को आदेश एफआईआर दर्ज करने की बात भी सामने आई है।
वहीं, 2025 में अवैध कब्जे के मामलों में जुर्माना मामले से संबंधित जानकारी के अनुसार, तत्कालीन तहसीलदार निशा आजाद ने 5 मई 2025 को फैसला सुनाते हुए अवैध कब्जाधारियों पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।
एसडीएम कफोटा कार्यालय से 5 दिसंबर 2025 को दोबारा निशानदेही करवाने के लिए लिखे जाने के बाद संबंधित कानूनगो ने निशानदेही कर 19 मार्च 2026 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।
उपलब्ध विवरण के अनुसार, रिपोर्ट में खसरा नंबर 3664/627 पर कथित कब्जे का उल्लेख किया गया। वहीं, हिमाचल प्रदेश सरकार की भूमि से संबंधित खसरा नंबर 4039/3662/626 पर भी अवैध कब्जा पाए जाने की बात दर्ज होने का दावा किया गया है।
मामले में नया विवाद 21 सितंबर 2026 को हुई निशानदेही को लेकर सामने आया। आरोप है कि संबंधित कानूनगो ने इस दौरान पहले से चिह्नित निशानों के साथ छेड़छाड़ की। इन आरोपों की ग्रामीणों ने स्वतंत्र एवं उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
उधर, एसडीएम कफोटा जसपाल ने इस मामले में तहसीलदार कमराऊ को जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
