HomeHimachalSirmaurपारंपरिक व्यंजन डमलांटी के साथ राजगढ़ में शुरू हुआ माघी, जानें ये...

पारंपरिक व्यंजन डमलांटी के साथ राजगढ़ में शुरू हुआ माघी, जानें ये पर्व क्यों है खास

राजगढ़|
जिला सिरमौर के राजगढ़ क्षेत्र में तीन दिवसीय माघी पर्व “डमलांटी” पारपंरिक व्यंजन के साथ आरंभ हुआ. डमलांटी के दिन लोग सायं को अपने घरों में आटे को गुड़ के साथ बिना घी से पकाते हैं. इस मीठे आटे को कई स्थानों पर  घीण्डा और कई गांव में बाड़ी भी कहा जाता है, जिसे देसी घी के साथ ही खाया जाता है. Maghi parava

राजगढ़ के पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष दिनेश आर्य का कहना है कि गुड़ निर्मित मीठा आटा की तासीर गर्म होती है, जिसे लोग डमलांटी के अलावा भी सर्दियों मेें अकसर खाते हैं. इनका कहना है कि मकर संक्रांति को सूर्य भगवान उतरायण हो जाते हैं और सर्दी का प्रकोप कम होने के साथ साथ दिन भी बढ़ने लगते हैं.

ये भी पढ़ें:  खिजवाड़ी में राष्ट्रीय युवा सप्ताह कार्यक्रम : लंबी कूद में अर्जुन व सोनिका, भाषण में साक्षी अव्वल

उन्होंने बताया कि डमलांटी दूसरे दिन अर्थात लोहड़ी की शाम को कुछ स्थानों पर सीडडू और अस्कली बनाई जाती है. जबकि, मकर संक्रांति के दिन सुबह खीर पटांड़े बनाए जाते हैं. इनका कहना है कि इस पर्व पर राजगढ़ क्षेत्र में लोहड़ी की रात को अलाव इत्यादि नहीं जलाया जाता और न ही रेवड़ी, गजक, मूंगफली आदि से अग्नि की पूजा की जाती है. हालांकि कुछ लोग इस पर्व को खिचड़ी बनाकर भी मनाते हैं. इनका कहना है कि मकर संक्रांति को समूचे राजगढ क्षेत्र में देव पूजा का विशेष विधान होता है. इस दिन लोग अपने मंदिरों में जाकर अपने कुल देवता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.Maghi parava

ये भी पढ़ें:  शिक्षकों ने सीखे आपदाओं से निपटने के गुर, गुरू नानक मिशन स्कूल में हुई ये खास कार्यशाला

बता दें सिरमौर व शिमला जिला में वर्ष के दौरान पड़ने वाली चार बड़ी साजी अर्थात बैशाखी, हरियाली, दिवाली और माघ की साजी को अपने कुल देवता व देवी की पारंपरिक पूजा करने का विशेष विधान है. लोगों की आस्था है कि इन चार बड़ी साजी पर पीठासीन देवता की पूजा से देवी-देवता प्रसन्न होते हैं.

दूसरी ओर गिरिपार क्षेत्र के शिलाई, हरिपुरधार, नौहराधार, संगड़ाह आदि क्षेत्रों मेें माघी पर्व एक सप्ताह तक बडे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता हैं, जिसमें गिरिपार के अत्याधिक ठंड वाले क्षेत्रों में माघी पर्व पर बकरों को काटा जाता है. यह प्रथा वर्तमान में भी कायम है. माघी पर्व पर गिरिपार क्षेत्र में मेहमानवाजी की प्रथा आज भी प्रचलित है. लोग अपने सगे संबंधियों विशेषकर बेटियों को आमंत्रित करते हैं.

ये भी पढ़ें:  पांवटा साहिब में तेज रफ्तार डंपर की टक्कर से एक युवक घायल, हायर सेंटर रैफर
Hitesh Sharma
Hitesh Sharmahttps://aapkibaatnews.com
हितेश शर्मा 'आपकी बात न्यूज़ नेटवर्क' के संस्थापक और मुख्य संपादक हैं। दो दशकों से भी अधिक लंबे अपने करिअर में, वे 'अमर उजाला' 'दैनिक भास्कर' दैनिक ट्रिब्यून, पंजाब केसरी और दिव्य हिमाचल जैसे प्रमुख प्रकाशनों में महत्वपूर्ण संपादकीय जिम्मेदारियां निभाई हैं। एक अनुभवी पत्रकार और पूर्व ब्यूरो प्रमुख के तौर पर, हितेश अपनी गहन ज़मीनी रिपोर्टिंग और नैतिक व प्रभावशाली पत्रकारिता के प्रति अपने अटूट समर्पण के लिए व्यापक रूप से सम्मानित हैं। वे जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग करने में विशेषज्ञता रखते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि हर कहानी को पूरी गहराई और ज़िम्मेदारी के साथ प्रस्तुत किया जाए।

Latest Articles

Explore More