HomeNationalथार मरुस्थल में सिंधु घाटी सभ्यता के नवीन अवशेषों की खोज

थार मरुस्थल में सिंधु घाटी सभ्यता के नवीन अवशेषों की खोज

सिंधु घाटी सभ्यता की पड़ताल में नया मोड़, जैसलमेर के सीमावर्ती गांव में मिले ऐतिहासिक साक्ष्य... विशेषज्ञों को लाल रंग के हस्तनिर्मित व चाक मृदभांड, जिनमें घड़े, कटोरे, चूड़ियां, छिद्रित (परफोरेटेढ) पात्र आदि बरामद हुए। इन पर ज्यामितीय रेखाओं से अलंकरण किया गया है। इसके अतिरिक्त गेहूंए रंग के मृदभांड (मटके, प्याले आदि), चरट पत्थर से बने चाकू और प्राचीन ईंटों से निर्मित दीवारों के अवशेष भी मिले हैं।

रामगढ़, जैसलमेर : विश्व की प्राचीनतम नगरीकृत सभ्यता मानी जाने वाली सिंधु घाटी सभ्यता से संबंधित संभावित अवशेष थार मरुस्थल में पाए जाने की संभावना ने इतिहासकारों और पुरातत्वविदों के बीच एक नई हलचल पैदा कर दी है।

जैसलमेर जिले की रामगढ़ तहसील के सीमावर्ती गांव साधेवाला के रातड़िया तला क्षेत्र में हुए हालिया अन्वेषण में ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जो हड़प्पाकालीन नगर की ओर इशारा कर रहे हैं।

यह खोज भोजराज की ढाणी, राउमा विद्यालय में कार्यरत वरिष्ठ अध्यापक और सीमाजन कल्याण समिति के जिला उपाध्यक्ष प्रदीप कुमार गर्ग ने की है। उन्होंने इस स्थल पर प्राप्त ऐतिहासिक अवशेषों की जानकारी Save Our Heritage Foundation और प्रख्यात इतिहासकारों को दी।

ये भी पढ़ें:  नामी गर्ल्ज यूनिवर्सिटी के टॉयलेट में छात्रा का वीडियो बनाते पकड़ा गया सफाई कर्मचारी, छात्राओं ने किया प्रदर्शन

इसके उपरांत हिमाचल प्रदेश में इतिहास विभाग के सहायक आचार्य डॉ. पंकज चांडक (जिनकी पुस्तक “An Introduction to Archaeology” पुरातत्वशास्त्र का महत्वपूर्ण ग्रंथ है) और अरावली महाविद्यालय सुमेरपुर के प्राचार्य डॉ. कृष्णपाल सिंह ने जून माह में इस स्थल का निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान विशेषज्ञों को लाल रंग के हस्तनिर्मित व चाक मृदभांड, जिनमें घड़े, कटोरे, चूड़ियां, छिद्रित (परफोरेटेढ) पात्र आदि बरामद हुए। इन पर ज्यामितीय रेखाओं से अलंकरण किया गया है। इसके अतिरिक्त गेहूंए रंग के मृदभांड (मटके, प्याले आदि), चरट पत्थर से बने चाकू और प्राचीन ईंटों से निर्मित दीवारों के अवशेष भी मिले हैं।

इन साक्ष्यों के आधार पर डॉ. पंकज चांडक और डॉ. कृष्णपाल सिंह ने अनुमान लगाया कि यह स्थल एक सुव्यवस्थित, आर्थिक व सामाजिक दृष्टि से विकसित हड़प्पाकालीन नगरी रहा होगा। विलुप्त सरस्वती नदी की मुहाने पर यह स्थल स्थित होगा, जिसका क्षेत्रफल लगभग 50×50 मीटर के आसपास रहा होगा।

ये भी पढ़ें:  भारी बारिश के अलर्ट के बीच सिरमौर जिले में आज बंद रहेंगे सभी सरकारी और निजी शैक्षणिक संस्थान, आदेशों पर खड़ा हुआ बड़ा सवाल

प्रदीप गर्ग, डॉ. पंकज चांडक और डॉ. केपी सिंह का मानना है कि यदि इस क्षेत्र में गहन पुरातात्विक सर्वेक्षण किया जाए तो और भी स्थल सामने आ सकते हैं। संभावना ये भी जताई गई है कि सरस्वती नदी की विलुप्त जलधारा, जिसका उल्लेख ऋग्वैदिक ग्रंथों में मिलता है, उसे भी इस क्षेत्र में पुनः खोजा जा सकता है।

इन्हीं संभावनाओं की पुष्टि के लिए 29 जुलाई 2025 को प्रख्यात पुरातत्वविद डॉ. जीवनलाल खडगवाल के नेतृत्व में एक सर्वेक्षण टोली साधेवाला गांव पहुंची। वहीं, जल संरक्षणकर्ता चतर सिंह जाम और स्थानीय शिक्षक भूरसिंह जाम ने मार्गदर्शक की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

ये भी पढ़ें:  बद्दी पुलिस का बड़ा एक्शन, 2 अलग-अलग मामलों में चिट्टे के साथ 3 दबोचे

इतिहासकार डॉ. पंकज चांडक ने कहा कि प्रदीप गर्ग की यह खोज राजस्थान के प्रागैतिहासिक अध्ययन में एक नई दिशा प्रदान करेगी और यदि प्रमाण पुष्ट होते हैं तो यह स्थल न केवल थार मरुस्थल, बल्कि संपूर्ण भारत के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त कर सकता है।

Hitesh Sharma
Hitesh Sharmahttps://aapkibaatnews.com
हितेश शर्मा 'आपकी बात न्यूज़ नेटवर्क' के संस्थापक और मुख्य संपादक हैं। दो दशकों से भी अधिक लंबे अपने करिअर में, वे 'अमर उजाला' 'दैनिक भास्कर' दैनिक ट्रिब्यून, पंजाब केसरी और दिव्य हिमाचल जैसे प्रमुख प्रकाशनों में महत्वपूर्ण संपादकीय जिम्मेदारियां निभाई हैं। एक अनुभवी पत्रकार और पूर्व ब्यूरो प्रमुख के तौर पर, हितेश अपनी गहन ज़मीनी रिपोर्टिंग और नैतिक व प्रभावशाली पत्रकारिता के प्रति अपने अटूट समर्पण के लिए व्यापक रूप से सम्मानित हैं। वे जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग करने में विशेषज्ञता रखते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि हर कहानी को पूरी गहराई और ज़िम्मेदारी के साथ प्रस्तुत किया जाए।

Latest Articles

Explore More