
नाहन : हिमाचल प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी जमीन तैयार होने लगी है और जिला सिरमौर इस बार प्रदेश की राजनीति के केंद्र में नजर आ रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि कांग्रेस, भाजपा और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रदेश अध्यक्षों का सीधा संबंध सिरमौर से है। वहीं राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी के अध्यक्ष रुमित ठाकुर का भी सिरमौर से गहरा पारिवारिक और शैक्षणिक नाता रहा है। ऐसे में 2027 के चुनाव से पहले सिरमौर का राजनीतिक महत्व प्रदेश स्तर पर बढ़ गया है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल नाहन विधानसभा क्षेत्र से आते हैं और यहां से 2 बार विधायक रह चुके हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार श्रीरेणुकाजी विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीसरी बार विधायक हैं। वहीं लोक जनशक्ति पार्टी ने नाहन के नितिन चौहान उर्फ टिंकू को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है। यहां सवाल ये भी उठता है कि क्या ये अपने अपने विधानसभा क्षेत्र से मैदान में उतरेंगे या नहीं। यदि मैदान में उतरते भी हैं तो दोहरी जिम्मेदारी के साथ प्रदेश में सरकार बनाने के लिए कौन किंग मेकर साबित होगा।
प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है। ऐसे में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल के सामने अपने गृह जिले समेत प्रदेश में संगठन को मजबूती देने के साथ साथ भाजपा की सरकार बनाना बड़ी चुनौती होगी। दूसरी ओर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार के लिए भी सरकार के कामकाज और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बनाकर मिशन रिपीट करवाने में कामयाबी हासिल करना संगठन में मजबूत पकड़ भी साबित करेगा।
इसके साथ साथ नितिन चौहान की LJP में एंट्री ने सिरमौर के चुनावी समीकरण में नया कोण जोड़ दिया है। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद युवाओं के रोजगार और हिमाचल में तीसरे मजबूत राजनीतिक विकल्प की बात कही है। यदि LJP आने वाले समय में सिरमौर में अपना संगठन बूथ स्तर तक मजबूत करती है तो कांग्रेस और भाजपा के बीच होने वाले पारंपरिक मुकाबले पर इसका असर पड़ सकता है।
वहीं राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी के अध्यक्ष रुमित ठाकुर का ननिहाल जिला सिरमौर में है। उनकी शिक्षा भी नाहन में हुई है और उनका सिरमौर से लंबे समय से गहरा जुड़ाव रहा है। इस तरह कांग्रेस, भाजपा, लोक जनशक्ति पार्टी और राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी के प्रमुख राजनीतिक चेहरों का सिरमौर से जुड़ाव इस जिले को 2027 की सियासत में खास बना रहा है।
सिरमौर की खासियत अब केवल यह नहीं रह गई है कि यहां से अलग-अलग दलों के बड़े नेता आते हैं, बल्कि यह है कि 2027 के चुनाव में इन नेताओं की राजनीतिक और संगठनात्मक क्षमता का असर उनके गृह जिले और आसपास के क्षेत्रों में भी दिखाई दे सकता है। इसी वजह से सिरमौर में होने वाली राजनीतिक गतिविधियों पर प्रदेश की नजर रहना स्वाभाविक है।
2027 का विधानसभा चुनाव भले अभी दूर हो, लेकिन सिरमौर में इसकी राजनीतिक हलचल तेज हो चुकी है। 5 विधानसभा सीटों वाला यह जिला अब सिर्फ एक चुनावी क्षेत्र नहीं, बल्कि हिमाचल की सत्ता के लिए बनने वाले राजनीतिक समीकरणों का महत्वपूर्ण केंद्र बनता दिख रहा है।