श्री रेणुकाजी : करीब 12 साल के लंबे इंतजार के बाद मिजी जू श्री रेणुकाजी में एक बार फिर ‘जंगल के राजा’ की दहाड़ गूंजने वाली है। महाराष्ट्र के नागपुर स्थित गोरेवाड़ा से रॉयल बंगाल टाइगर का एक जोड़ा पूरे एस्कॉर्ट के साथ करीब 41 घंटे के लंबे सफर के बाद सुरक्षित श्री रेणुकाजी पहुंच गया है। जोड़े में पांच वर्षीय नर टाइगर और करीब ढाई से तीन वर्ष की मादा टाइगर शामिल है। दोनों बंगाली टाइगरों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर नागपुर से श्री रेणुकाजी तक वन्यजीव विभाग की टीम ने पल-पल निगरानी रखी।
रॉयल बंगाल टाइगर के इस जोड़े के श्री रेणुकाजी पहुंचने के साथ ही चिड़ियाघर में लंबे समय से चल रही बाघ लाने की कवायद अब धरातल पर उतर गई है। इन बाघों के लिए करीब 1.68 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक बाड़ा तैयार किया गया है। केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के निर्धारित मानकों और आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद दोनों बाघों को नागपुर से यहां लाया गया है। लिहाजा, हिमाचल अब इन बंगाली टाइगरों का स्थायी घर बनेगा।
नागपुर से रेणुकाजी हर पल साथ रही टीम
बाघों को नागपुर के गोरेवाड़ा से सड़क मार्ग के जरिए श्री रेणुका जी लाया गया। इस लंबे सफर में वन्यजीव विभाग की टीम लगातार दोनों बाघों के साथ रही। टीम ने पूरे रास्ते उन्हें एस्कॉर्ट किया और उनकी सेहत, भोजन, पानी और आराम का विशेष ध्यान रखा।
वन्यजीव डीएफओ डॉ. शाहनवाज स्वयं टीम के साथ नागपुर गए और बाघों को लेकर श्री रेणुकाजी लौटे। उनके साथ पशु चिकित्सक डॉ. कार्तिक, पशु हैंडलर और फील्ड स्टाफ सहित करीब आठ सदस्यीय टीम रही। सफर के दौरान हर दो से तीन घंटे के अंतराल पर आवश्यकतानुसार विश्राम कराया गया। बाघों को पानी उपलब्ध कराने के साथ वाहनों और उनके आसपास साफ-सफाई का भी विशेष ध्यान रखा गया। गर्म मौसम को देखते हुए जरूरत पड़ने पर पानी से उन्हें ठंडक भी दी गई।
10-12 साल से चल रही थी कवायद
श्री रेणुकाजी चिड़ियाघर में रॉयल बंगाल टाइगर लाने की प्रक्रिया पिछले करीब 10 से 12 वर्षों से चल रही थी। बाघों को यहां लाने के लिए केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की स्वीकृतियों के अलावा महाराष्ट्र और केंद्र सरकार से जुड़ी विभिन्न औपचारिकताओं को पूरा करना पड़ा। पिछले एक-दो वर्षों में वन्यजीव विभाग ने इस प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया।
वन्यजीव विभाग की अरण्यपाल प्रीति भंडारी, वन्यजीव डीएफओ डॉ. शाहनवाज और उनकी टीम के लगातार प्रयासों के बाद अब यह इंतजार खत्म हुआ है। बाघों के लिए तैयार किए गए बाड़े को भी केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के निर्धारित मानकों के अनुरूप विकसित किया गया है।
1.68 करोड़ में तैयार हुआ ‘राजा-रानी’ का बाड़ा
श्री रेणुकाजी चिड़ियाघर में रॉयल बंगाल टाइगर के इस जोड़े के लिए करीब 1.68 करोड़ रुपये की लागत से बाड़ा तैयार किया गया है। बाघों की सुरक्षा और उनकी प्राकृतिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसे विकसित किया गया है। अब यह बाड़ा चिड़ियाघर के प्रमुख आकर्षणों में शामिल होने जा रहा है।
दोनों बाघों के लिए नियमित रूप से मांसाहारी आहार की व्यवस्था की जाएगी। उनके खान-पान और स्वास्थ्य की नियमित निगरानी होगी। पशु चिकित्सक की देखरेख में दोनों के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जाएगी।
वन्यजीव पर्यटन को मिलेगा नया आकर्षण
रॉयल बंगाल टाइगर के जोड़े के पहुंचने से श्री रेणुकाजी के वन्यजीव पर्यटन को भी नया आकर्षण मिलने की उम्मीद है। रेणुकाजी झील और आसपास का क्षेत्र पहले से ही प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण है। प्रवासी पक्षियों के कारण भी यह क्षेत्र वन्यजीव और प्रकृति प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र रहता है।
अब चिड़ियाघर में रॉयल बंगाल टाइगर की मौजूदगी से पर्यटकों, वन्यजीव प्रेमियों, शोधकर्ताओं और फोटोग्राफरों के लिए एक नया आकर्षण जुड़ गया है। इससे श्री रेणुकाजी की पर्यटन पहचान को और मजबूती मिलने की संभावना है।
दशकभर की कवायद के बाद टीम में उत्साह
नागपुर से दोनों बाघों को सुरक्षित श्री रेणुकाजी पहुंचाने वाली टीम के लिए यह महज एक स्थानांतरण अभियान नहीं है। सफर के दौरान बाघों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर टीम लगातार सतर्क रही। एक दशक से अधिक समय से चल रही प्रक्रिया के बाद आखिरकार बाघों का जोड़ा चिड़ियाघर पहुंचने से वन्यजीव विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में भी खासा उत्साह है।
डीएफओ डॉ. शाहनवाज ने की पुष्टि
वन्यजीव डीएफओ डॉ. शाहनवाज ने रॉयल बंगाल टाइगर के जोड़े के श्री रेणुकाजी पहुंचने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि बंगाली टाइगर रविवार दोपहर करीब 12ः30 बजे सुरक्षित रूप से चिड़ियाघर पहुंच गए हैं और उनकी देखरेख की समुचित व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि गोरेवाड़ा से वह बंगाली टाइगर को लेकर 18 सितंबर को शाम 7ः00 बजे हिमाचल के लिए निकले थे। पूरा सफर में राजा-रानी की शानो शौकत में कोई कमी नहीं आने दी गई। उन्होंने कहा कि रॉयल बंगाल टाइगर के जोड़े के आने से श्री रेणुकाजी चिड़ियाघर की रौनक बढ़ेगी और वन्यजीव प्रेमियों के लिए नया आकर्षण जुड़ गया है।