स्मार्ट मीटरों पर उठे सवालों पर बिजली बोर्ड का जवाब, कहा– संदेह हो तो दूसरा मीटर लगाकर कर लें गड़बड़ी की जांच

प्रवक्ता ने बताया कि स्मार्ट मीटर लगाए जाने से 125 यूनिट तक मिलने वाली मुफ्त बिजली की सुविधा पूरी तरह पहले की तरह जारी रहेगी। स्मार्ट मीटर से बिजली के बिलों में किसी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं होगी।

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शिमला : स्मार्ट बिजली मीटरों को लेकर सोशल मीडिया पर उठ रहे सवालों और आशंकाओं पर राज्य बिजली बोर्ड ने स्थिति स्पष्ट की है। बोर्ड का कहना है कि स्मार्ट मीटर की रीडिंग पर यदि किसी उपभोक्ता को संदेह है, तो दूसरा स्मार्ट मीटर लगाकर गड़बड़ी की जांच की जा सकती है। बोर्ड ने साफ किया कि स्मार्ट मीटर लगने से न तो बिजली बिल बढ़ेगा और न ही सब्सिडी व्यवस्था पर कोई असर पड़ेगा।

बोर्ड प्रवक्ता की ओर से जारी बयान में कहा गया कि प्रदेश सरकार ने उपभोक्ताओं को यह सुविधा दी है कि वे संदेह की स्थिति में मौजूदा मीटर के साथ दूसरा स्मार्ट मीटर लगवा सकें। यदि किसी तरह की तकनीकी गड़बड़ी सामने आती है, तो उपभोक्ता अपने संबंधित विद्युत उप-मंडल कार्यालय से संपर्क कर सकता है।

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प्रवक्ता ने बताया कि स्मार्ट मीटर लगाए जाने से 125 यूनिट तक मिलने वाली मुफ्त बिजली की सुविधा पूरी तरह पहले की तरह जारी रहेगी। स्मार्ट मीटर से बिजली के बिलों में किसी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं होगी। उन्होंने जानकारी दी कि प्रदेश में अब तक करीब 7.5 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं।

बिजली बोर्ड के अनुसार स्मार्ट मीटर केवल बिजली खपत मापने का उपकरण है, जैसे पहले पारंपरिक मीटर होते थे। अंतर यह है कि पुराने मीटरों में कई बार मासिक आधार पर औसत रीडिंग से बिल जारी हो जाते थे, जबकि स्मार्ट मीटर में वास्तविक खपत के आधार पर ही बिल तैयार होता है। स्मार्ट मीटर का डाटा स्वतः केंद्रीय डाटा सेंटर तक पहुंचता है, जिससे रियल-टाइम आधार पर निगरानी और बिलिंग संभव होती है।

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प्रवक्ता ने कहा कि स्मार्ट मीटर प्रणाली पारदर्शिता बढ़ाने, व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं देने की दिशा में एक अहम कदम है। उन्होंने लोगों से अपील की कि स्मार्ट मीटर को लेकर फैलाई जा रही अफवाहों पर भरोसा न करें और केवल प्रमाणित जानकारी पर ही विश्वास करें।