धौलाकुआं में विद्यार्थियों ने परखी बागवानी की आधुनिक तकनीक, सैद्धांतिक ज्ञान के साथ मिला व्यावहारिक अनुभव

प्रशिक्षण के दौरान सह-निदेशक (अनुसंधान एवं विस्तार) डॉ. प्रियंका ठाकुर ने विद्यार्थियों को गेंदा, डहलिया, जंगली शोभाकार पौधों और शीतकालीन वार्षिक पुष्पीय फसलों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

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पांवटा साहिब : क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र धौलाकुआं में पीएम श्री जीएमजी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पांवटा साहिब के नौवीं कक्षा के 13 विद्यार्थियों के लिए दो दिवसीय कार्यस्थल प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यार्थियों को बागवानी एवं कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक खेती, मूल्य संवर्धन और करिअर संभावनाओं से परिचित कराना रहा, जिससे उन्हें सैद्धांतिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त हो सका।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यालय के प्रधानाचार्य मुंशी राम वर्मा के मार्गदर्शन में शिक्षकों ज्योति रावत और अक्षय कुमार के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। इस दौरान बच्चों ने ड्राई फ्लावर प्रयोगशाला का भ्रमण किया। यहां उन्हें सूखे फूलों से तैयार किए जाने वाले विभिन्न मूल्य संवर्धित उत्पादों की जानकारी दी गई और उनके निर्माण की प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से समझाया गया।

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प्रशिक्षण के दौरान सह-निदेशक (अनुसंधान एवं विस्तार) डॉ. प्रियंका ठाकुर ने विद्यार्थियों को गेंदा, डहलिया, जंगली शोभाकार पौधों और शीतकालीन वार्षिक पुष्पीय फसलों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने शोभाकार पौधों के महत्व, उनकी पहचान, प्रवर्धन की विधियों और प्रमुख अंतर-सांस्कृतिक क्रियाओं पर प्रकाश डालते हुए अनुसंधान केंद्र में अपनाई जा रही आधुनिक वैज्ञानिक खेती की तकनीकों से विद्यार्थियों को अवगत कराया।

इसके अलावा डॉ. शिल्पा ने आम, लीची और ड्रैगन फ्रूट जैसी उपोष्ण कटिबंधीय फल फसलों के प्रवर्धन और बाग प्रबंधन की उन्नत पद्धतियों पर मार्गदर्शन दिया। डॉ. सिमरन कश्यप ने फोलिएज और पुष्पीय लैंडस्केप पौधों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया, जिसमें प्रवर्धन तकनीकों का प्रदर्शन, क्यारियों में शीतकालीन वार्षिक पौधों का रोपण और गमलों में रोपण और पुनः रोपण की प्रक्रियाएं शामिल रहीं। कार्यक्रम के संचालन में क्षेत्र सहायक (ग्रेड-1) राकेश का भी सक्रिय सहयोग रहा।

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प्रशिक्षण का समापन संवादात्मक चर्चा के साथ किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने अनुसंधान केंद्र में प्राप्त अनुभवों के प्रति गहरी रुचि और संतोष व्यक्त किया।