HomeAgricultureKISAN ADVISORY : मूली की ये किस्म उगाएं और 50 से 55...

KISAN ADVISORY : मूली की ये किस्म उगाएं और 50 से 55 दिन में तैयार पाएं फसल, खरपतवारों से हैं परेशान तो…

नाहन|
KISAN ADVISORY : चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के प्रसार शिक्षा निदेशालय ने जनवरी माह के दूसरे पखवाड़े में किए जाने वाले मौसम पूर्वानुमान संबंधित कृषि कार्यों को लेकर किसानों के लिए एडवायजरी जारी की है. कृषि विज्ञान केंद्र धौलाकुआं के प्रभारी एवं प्रधान वैज्ञानिक डा. पंकज मित्तल ने बताया कि किसान उन्नत खेती के लिए इन विधियों को अपनाकर लाभांवित हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि अच्छी खेती के लिए कृषि विश्वविद्यालय की ओर से माह में दो बार एडवाइजरी और मार्गदर्शिका जारी की जा रही है. ताकि, किसान मौसम के पूर्वानुमान संबंधी कृषि कार्यों को अंजाम दे सकें.

मूली की ये किस्म बिजाई के लिए बेहतर
डा. पंकज मित्तल ने कहा, मूली की पूसा हिमानी किस्म उगाकर किसान 50 से 55 दिनों में फसल तैयार कर सकते हैं. निचले पर्वतीय क्षेत्र जहां सिंचाई की सुविधा है वहां मूली की खेती की जा सकती है. बिजाई के लिए पूसा हिमानी बेहतरीन किस्म है, जो लगभग दो माह के भीतर उगकर तैयार हो जाती है. लिहाजा, किसान इसका चयन कर सकते हैं. मूली की बिजाई हल्की मिट्टी में समतल क्यारी या फिर भारी मिट्टी में मेड़ बनाकर 15-20 सेंटीमीटर की दूरी पर की जा सकती है.

ये भी पढ़ें:  राजगढ़ में SIU की बड़ी कार्रवाई : 22 से 25 साल के 3 युवक चिट्टे के साथ गिरफ्तार

आलू की बुआई के लिए अपनाएं ये किस्में
मध्यवर्ती क्षेत्रों में आलू की बुआई के लिए कुफरी ज्योति, कुफरी गिरिराज, कुफरी चन्द्रमुखी व कुफरी हिमालिनी किस्मों का चयन करें. बुआई के लिए स्वस्थ, रोग-रहित, साबुत या कटे हुए कन्द, वजन लगभग 30 ग्राम, कम से कम 2-3 आंखें हों, का प्रयोग करें. बुआई से पहले कन्दों को डाईथेन एम-45 (25 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी) के घोल में 20 मिनट तक उपचारित करें. कंद को छाया में सुखाने के बाद अच्छी तरह से तैयार खेतों में 45-60 सेंटीमीटर पंक्तियों की दूरी और कन्द को 15-20 सेंटीमीटर के अंतर पर पंक्ति में मेड़े बनाकर बिजाई करें.
बिजाई से पहले 20 क्विंटल गोबर की खाद के अतिरिक्त 20 कि.ग्रा. इफको (12:32:16) मिश्रण खाद और 5 कि.ग्रा. यूरिया प्रति बीघा अंतिम जुताई के समय खेतों में डालें. आलू की रोपाई के एक सप्ताह बाद खरपतवार नियंत्रण के लिए ऑक्सीफ्लुराफेन 12 ग्राम प्रति बीघा या 3 से 4 सप्ताह बाद मेट्रीब्यूजीन 60 ग्राम प्रति बीघा (60 लीटर पानी में घोलकर) का छिड़काव करें. छिड़काव करते समय खेत में नमी होनी चाहिए. इसके अलावा आलू का 5 प्रतिशत अंकुरण होने पर खरपतवार नियंत्रण के लिए ग्रामेक्सॉन 180 मिली लीटर प्रति बीघा (60 लीटर पानी) का छिड़काव किया जा सकता है.

ये भी पढ़ें:  मिलिए... सिरमौर की 'सुपर मॉम और बेटे' से.. दोनों ने गोल्ड मेडल जीत देश में लहराया परचम, हिमाचल के इतिहास में शायद ऐसा पहली बार

इन सब्जियों की करें निराई व गुड़ाई
इस समय खेत में पहले से लगी हुई सब्जियों फूलगोभी, बन्दगोभी, गांठगोभी, ब्रॉकली, चाईनीज-बन्दगोभी, पालक, मैथी, मटर, प्याज व लहसुन इत्यादि में निराई-गुड़ाई करें और नाइट्रोजन के रूप में यूरिया 4 कि.ग्रा. प्रति बीघा निराई गुड़ाई करते हुए खेतों में डालें.

गेहूं को पीला रतुआ से ऐसे बचाएं
गेहूं के पत्तों के ऊपर पीले रंग की दानेदार सीधी धारियों व दूसरी ओर पत्तों में धारीदार पीलापन दिखाई देता है, जिससे प्रभावित पौधे बौने रह जाते हैं. दाने या तो बनते नहीं या छोटे व झुर्रीदार बनते हैं जिससे पैदावार प्रभावित होती है. इसके नियंत्रण के लिए गेहूं की फसल में टिल्ट-प्रोपिकोनाजोल 25 ई.सी. या टेबुकोनाजोल 25 ई.सी. या बेलाटॉन 25 डब्ल्यू.पी. का 0.1 प्रतिशत घोल यानी 60 मि.ली. दवाई 60 लीटर पानी में घोलकर प्रति बीघा की दर से छिड़काव करें व 15 दिन के अन्तराल पर इसे फिर से दोहराएं.

खरपतवारों पर करें इन दवाइयों का छिड़काव
सिंचित गेहूं की 30 से 35 दिन की फसल में जहां खरपतवारों में 2-3 पत्तियां आ गई हों, संकरी एवं चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों के नियंत्रण के लिए वेस्टा (मेटसल्फयूरॅान मिथाईल 20 डब्ल्यू पी. क्लोडिनाफॉप प्रोपार्जिल 15 डब्ल्यू पी.) 16 ग्राम प्रति 30 लीटर पानी में मिलाकर खेतों में छिड़काव करें. अगर फसल में सिर्फ चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार हों तो उसके नियंत्रण के लिए 2,4-डी की 50 ग्राम मात्रा या मेटसल्फयूरॉन मिथाईल 20 डब्ल्यूपी 80 मिली ग्राम को 30 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें. छिड़काव के लिए फ्लैट फैन नोजल का इस्तेमाल करें. गेहूं के साथ अगर चौड़ी पत्ती वाली फसल की खेती की गई हो तो 2,4-डी या मेटसल्फयूरॉन मिथाईल का प्रयोग न करें. छिड़काव से दो-तीन दिन पहले एक हल्की सिंचाई करने के बाद ही छिड़काव करें.

ये भी पढ़ें:  कांग्रेस सरकार के पाप का घड़ा अब भरने वाला, कभी हो सकती है रूखसत : बिंदल

साग वाली फसलों पर न छिड़कें कीटनाशक
सरसों वर्गीय तिलहनी फसलों में तेला यानि एफिड़ के नियंत्रण के लिए डाईमिथोएट 30 ई.सी. या ऑक्सीडेमेटोन मिथाईल 25 ई.सी. की 1.0 मिलीलीटर मात्रा प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें. प्रभावी नियंत्रण के लिए एक बीघा में 60 लीटर घोल का छिड़काव अवश्य करें. छिड़काव सुबह 9ः00 बजे से पहले करें, ताकि मधुमक्खी जैसे मित्र कीटों को क्षति न हो. साग वाली फसलों में इन कीटनाशकों का छिड़काव न करें.

Hitesh Sharma
Hitesh Sharmahttps://aapkibaatnews.com
हितेश शर्मा 'आपकी बात न्यूज़ नेटवर्क' के संस्थापक और मुख्य संपादक हैं। दो दशकों से भी अधिक लंबे अपने करिअर में, वे 'अमर उजाला' 'दैनिक भास्कर' दैनिक ट्रिब्यून, पंजाब केसरी और दिव्य हिमाचल जैसे प्रमुख प्रकाशनों में महत्वपूर्ण संपादकीय जिम्मेदारियां निभाई हैं। एक अनुभवी पत्रकार और पूर्व ब्यूरो प्रमुख के तौर पर, हितेश अपनी गहन ज़मीनी रिपोर्टिंग और नैतिक व प्रभावशाली पत्रकारिता के प्रति अपने अटूट समर्पण के लिए व्यापक रूप से सम्मानित हैं। वे जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग करने में विशेषज्ञता रखते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि हर कहानी को पूरी गहराई और ज़िम्मेदारी के साथ प्रस्तुत किया जाए।

Latest Articles

Explore More