नाहन : जिला सिरमौर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय नाहन में वीरवार को गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम (पीसी-पीएनडीटी) के सफल क्रियान्वयन के लिए गठित जिला सलाहकार समिति की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) सिरमौर डॉ. राकेश प्रताप ने की।
बैठक में उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों को बताया गया कि इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य गर्भधारण से पहले या बाद में लिंग चयन तकनीकों के उपयोग को रोकना और कन्या भ्रूण हत्या पर अंकुश लगाना है। अल्ट्रासाउंड या किसी भी अन्य तकनीक के माध्यम से भ्रूण के लिंग का पता लगाना पूर्णतया प्रतिबंधित है और सभी अल्ट्रासाउंड क्लीनिकों के लिए इस अधिनियम के तहत पंजीकरण करवाना अनिवार्य है।
उन्होंने बताया कि जिला सिरमौर में वर्तमान में 24 अल्ट्रासाउंड क्लीनिक क्रियाशील हैं, जिनमें 8 सरकारी और 16 निजी क्षेत्र में कार्यरत हैं। वर्ष 2025 के दौरान 42 बार अल्ट्रासाउंड केंद्रों का निरीक्षण किया गया, जहां अधिनियम के तहत निर्धारित मापदंड पूर्ण पाए गए। जिला में वर्तमान व्यस्क लिंग अनुपात 1000 पुरुषों के मुकाबले 923 महिलाएं दर्ज हैं, जबकि जन्म के समय लिंग अनुपात 925 है।
सीएमओ ने कहा कि जिस पंचायत में लिंग अनुपात बेहतर होता है, उसे सरकार द्वारा 5 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। वहीं इंदिरा गांधी बालिका सुरक्षा योजना के तहत एक बेटी के जन्म के बाद स्थाई परिवार नियोजन अपनाने पर 35 हजार रुपये और दो बेटियों के बाद परिवार नियोजन करने पर 25 हजार रुपये की राशि प्रदान की जाती है।
बैठक में जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. निसार अहमद, जिला न्यायवादी चंपा सुरिल, डॉ. अमोद, डॉ. दिनेश, डॉ. ईशान शर्मा सहित समिति के सदस्य उपस्थित रहे।
