आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना को एक और बड़ी ताकत मिली, जब प्रोजेक्ट 17-ए श्रेणी का चौथा शक्तिशाली युद्धपोत ‘INS तारागिरी’ औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल किया गया। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मौजूद रहे। करीब 6,670 टन क्षमता वाला यह आधुनिक स्टील्थ युद्धपोत युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किया गया है और माझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने एमएसएमई के सहयोग से इसका निर्माण किया है।
रक्षा मंत्री ने इंट्रो के बाद अपने संबोधन में कहा कि आईएनएस तारागिरी केवल एक युद्धपोत नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता, आत्मनिर्भरता और मजबूत नौसैनिक शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्तमान समय में एक मजबूत और सक्षम नौसेना का निर्माण बेहद जरूरी है, क्योंकि भारत की 11,000 किलोमीटर लंबी तटरेखा और 95 प्रतिशत व्यापार समुद्री मार्गों पर निर्भर है।
आईएनएस तारागिरी की खासियत इसकी उन्नत स्टील्थ तकनीक है, जो इसे रडार से बचने में सक्षम बनाती है। इसमें ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक मिसाइलें, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, आधुनिक रडार और सोनार सिस्टम लगाए गए हैं। यह युद्धपोत उच्च तीव्रता वाले युद्ध के साथ-साथ समुद्री सुरक्षा, एंटी-पायरेसी ऑपरेशन, तटीय निगरानी और मानवीय मिशनों में भी प्रभावी भूमिका निभा सकता है।
रक्षा मंत्री ने बदलते वैश्विक परिदृश्य में समुद्री सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहकर व्यापारिक जहाजों और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक दौर में समुद्र के नीचे बिछी डिजिटल केबल्स वैश्विक संचार की रीढ़ हैं, जिनकी सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।
75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से निर्मित यह युद्धपोत भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को मजबूती देता है। इसके निर्माण में 200 से अधिक एमएसएमई शामिल रहे, जिससे रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। आईएनएस तारागिरी के नौसेना में शामिल होने से भारत की समुद्री ताकत और क्षेत्रीय संतुलन दोनों को मजबूती मिलेगी।
