नई दिल्ली : अमेरिका-ईरान जंग के बीच बढ़ती अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों का असर भारत में भी दिखने लगा है। सरकारी तेल कंपनियों ने शुक्रवार को कमर्शियल एलपीजी और 5 किलो वाले छोटे सिलेंडर के दामों में अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी कर दी।
19 किलो का कमर्शियल सिलेंडर एक झटके में 993 रुपये महंगा होकर 3,071.50 रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जबकि 5 किलो का छोटा सिलेंडर 261 रुपये बढ़कर 810.50 रुपये का हो गया है।
हालांकि राहत की बात यह है कि 14 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है और यह 913 रुपये पर स्थिर बना हुआ है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने स्पष्ट किया है कि घरेलू उपभोक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय बाजार की महंगाई से फिलहाल सुरक्षित रखा गया है। साथ ही पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में भी कोई बदलाव नहीं किया गया।
तेल कंपनियों के मुताबिक देश में कुल ईंधन खपत का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा घरेलू गैस का है, इसलिए आम उपभोक्ताओं पर सीधा बोझ नहीं डाला गया। वहीं, औद्योगिक उपयोग और होटल-रेस्टोरेंट सेक्टर पर बड़ा असर पड़ा है, क्योंकि कमर्शियल सिलेंडर का उपयोग सबसे अधिक इन्हीं क्षेत्रों में होता है।
पिछले तीन महीनों में कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में लगातार उछाल देखने को मिला है। 1 मार्च को 114.50 रुपये, 1 अप्रैल को 195.50 रुपये और अब मई में 993 रुपये की बढ़ोतरी के बाद कुल 1,303 रुपये की रिकॉर्ड वृद्धि हो चुकी है।
इसके अलावा टेलीकॉम टावरों जैसे औद्योगिक उपयोग में आने वाले बल्क डीजल के दाम भी करीब 137 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 149 रुपये प्रति लीटर से ऊपर पहुंचा दिए गए हैं।
घरेलू एयरलाइनों के लिए हवाई ईंधन की कीमतें फिलहाल 1,04,927.18 रुपये प्रति किलोलीटर पर स्थिर रखी गई हैं, लेकिन वैश्विक संकट लंबा खिंचने पर ऊर्जा बाजार में और उथल-पुथल की आशंका बनी हुई है।
