नाहन : जिला सिरमौर के पच्छाद क्षेत्र में गत दिन हुई बेमौसमी बारिश, तेज आंधी और ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। चंद घंटों में खराब मौसम ने टमाटर और शिमला मिर्च जैसी नकदी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। क्षेत्र के किसानों का कहना है कि फसलों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
जानकारी के अनुसार पच्छाद के सिरमौरी मंदिर, डिंगरी सरजेट, भैलन, डिंगरी धिनी, मढ़ीघाट, जयहर, शाडिया, शौटी, मासरिया और नारग सहित कई इलाकों में बारिश के साथ आए तेज तूफान और ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी फसलों को बुरी तरह प्रभावित किया। किसानों के अनुसार टमाटर और शिमला मिर्च के पौधों की टहनियां टूट गई हैं और कई जगह फसल पूरी तरह बिछ गई है। वहीं, शिमला मिर्च और टमाटर भी खेतों में झड़ गए।
डिंगरी सरजेट के प्रताप सिंह, वीरेंद्र ठाकुर और योगेंद्र सिंह, डिंगरी धिनी के कुलदीप ठाकुर, शौटी के हितेंद्र सिंह और वीरेंद्र सिंह और शाडिया के नरदेव ठाकुर सहित अन्य किसानों ने बताया कि टमाटर और शिमला मिर्च इस क्षेत्र की प्रमुख नकदी फसलें हैं। एक किसान इन फसलों के एक सीजन पर लाखों रुपये खर्च करता है। करीब तीन-चार माह पहले लगाई गई फसल अब उत्पादन के चरण में पहुंच रही थी, लेकिन बेमौसमी बारिश, तेज हवाओं और ओलों ने फसलों को भारी नुकसान पहुंचा दिया।
किसानों का कहना है कि कई परिवारों की सालभर की आय इन नकदी फसलों पर निर्भर रहती है। ऐसे में मौसम की इस मार ने उनकी चिंता को बढ़ा दी है। प्रभावित किसानों ने कृषि विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर नुकसान का आकलन किया जाए और उचित मुआवजा प्रदान किया जाए।
बता दें कि पच्छाद क्षेत्र में बड़े स्तर पर नकदी फसलों की खेती की जाती है। ऐसे में उत्पादन प्रभावित होने की स्थिति में आने वाले दिनों में बाजार पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है। किसानों का मानना है कि यदि नुकसान का स्तर व्यापक रहा तो टमाटर और शिमला मिर्च की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। इसके साथ साथ बारिश ने बागवानी को भी प्रभावित किया है। इन इलाकों में प्लम, आडू और कीवी को भी भारी नुकसान हुआ है।
हालांकि, जिले के अधिकांश क्षेत्रों में हुई बारिश से फसलों को संजीवनी भी मिली है। लंबे समय से बारिश का इंतजार कर रहे किसानों को खेतों में पर्याप्त नमी मिलने से मक्की की बिजाई के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हैं। अब किसान मक्की की बिजाई आसानी से कर पाएंगे। वहीं अन्य फसलों के लिए भी बारिश काफी फायदेमंद मानी जा रही है। वहीं, बारिश के चलते तापमान में गिरावट आने से मैदानी क्षेत्रों के लोगों को भीषण गर्मी और लू से राहत मिली है।
