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कारगिल के रणबांकुरे के नाम पर 26 साल बाद भी घोषणाएं अधूरी, शहीद भीम सिंह के परिजनों का छलका दर्द

कारगिल ऑपरेशन रक्षक में मातृभूमि की रक्षा करते हुए वीरगति प्राप्त करने वाले शहीद लांस नायक भीम सिंह ठाकुर के नाम पर की गई घोषणाएं करीब 26 वर्ष बाद भी धरातल पर नहीं उतर सकी हैं।

राजगढ़ : कारगिल ऑपरेशन रक्षक में मातृभूमि की रक्षा करते हुए वीरगति प्राप्त करने वाले शहीद लांस नायक भीम सिंह ठाकुर के नाम पर की गई घोषणाएं करीब 26 वर्ष बाद भी धरातल पर नहीं उतर सकी हैं। शहीद के नाम पर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय हाब्बन और हाब्बन-शिवपुर-चंदोल सड़क का नामकरण करने की घोषणा आज तक पूरी नहीं हो पाई, जिससे परिजनों और क्षेत्र के लोगों में गहरा मलाल है।

जानकारी के अनुसार यह घोषणा तत्कालीन धूमल सरकार में वन मंत्री रहे रूप सिंह ठाकुर ने 11 जून 2001 को हाब्बन में शहीद की प्रतिमा के अनावरण समारोह के दौरान की थी। क्षेत्रवासियों का कहना है कि घोषणा के बाद वर्षों बीत गए, लेकिन इसे अमलीजामा नहीं पहनाया गया।

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गौरतलब है कि राजगढ़ ब्लॉक के हाब्बन क्षेत्र के शिवपुर गांव निवासी शहीद लांस नायक भीम सिंह ठाकुर कारगिल ऑपरेशन रक्षक के दौरान जम्मू-कश्मीर में तैनात थे। 11 जून 2000 को खूनीनाला क्षेत्र में आतंकवादियों के साथ मुकाबला करते हुए उन्होंने 24 वर्ष की आयु में सर्वोच्च बलिदान दिया था।

शहीद की स्मृति में उनके परिजनों ने अपने खर्च पर लांस नायक भीम सिंह ठाकुर की प्रतिमा बनवाकर हाब्बन के समीप शहीद पार्क में स्थापित की थी। इस प्रतिमा का अनावरण 11 जून 2001 को तत्कालीन मंत्री रूप सिंह ठाकुर द्वारा किया गया था। उसी अवसर पर विद्यालय और सड़क का नाम शहीद के नाम पर रखने की घोषणा की गई थी।

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पझौता स्वतंत्रता सेनानी समाज कल्याण समिति के अध्यक्ष जय प्रकाश चौहान, शकुंतला प्रकाश, राजेंद्र हाब्बी, वीरेंद्र हाब्बी सहित क्षेत्र के लोगों ने कहा कि घोषणा पूरी न होना शहीद के बलिदान के साथ बड़ा मजाक है। उनका कहना है कि वर्ष 2001 के बाद प्रदेश में पांच सरकारें बन चुकी हैं, लेकिन किसी भी सरकार ने इस मामले पर गंभीरता नहीं दिखाई। उन्होंने बताया कि इस संबंध में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष जी.आर. मुसाफिर से भी आग्रह किया गया था, लेकिन आश्वासन ही मिले।

शहीद भीम सिंह ठाकुर का जन्म 5 अगस्त 1975 को शिवपुर गांव में हुआ था। उनके पिता बिजली प्रसाद और माता रामकली साधारण किसान थे। उन्होंने दसवीं तक की शिक्षा हाब्बन और बारहवीं की पढ़ाई राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला फागू से पूरी की। वर्ष 1992 में वह गोरखा राइफल्स में भर्ती हुए थे। सेना में रहते हुए उन्होंने देश सेवा का फर्ज निभाया और 11 जून 2000 को आतंकवादियों से लड़ते हुए वीरगति प्राप्त की।

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Aapki Baat News Desk
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