बिलासपुर : जिला बिलासपुर के उपमंडल घुमारवीं की ग्राम पंचायत लंझता में एचपी शिवा परियोजना के माध्यम से जापानी फल का कलस्टर तैयार किया जा रहा है। लगभग 3.5 हेक्टेयर क्षेत्र में स्थापित इस क्लस्टर में कुल 37 किसानों की जमीन पर 2019 पौधों को इस वर्ष फरवरी माह में रोपित किया गया है। इस क्लस्टर के पूरी तरह क्रियाशील हो जाने पर जहां किसानों एवं बागवानों की आर्थिकी सुधार में एक अहम कदम साबित होगा तो वहीं जिला बिलासपुर जापानी फल तैयार कर प्रदेश के बागवानी क्षेत्र में एक अलग पहचान स्थापित होगी।
प्रदेश बागवानी विभाग द्वारा एचपी शिवा परियोजना के माध्यम से लंझता क्लस्टर में फूयू प्रजाति के जापानी फल के पौधों को 4 गुणा 4 क्षेत्रफल की दृष्टि से सफलतापूर्वक रोपित किया जा चुका है तथा प्रत्येक पौधे की जियो टैगिंग की गई है। जिससे जहां भविष्य में प्रत्येक पौधे की उपज से लेकर मार्केट तक की पहुंच की निगरानी की जा सकेगी तो वहीं बागवानों को भी बेहतर दाम प्राप्त करने में मदद मिलेगी। जिला बिलासपुर में जहां जापानी फल का यह दूसरा जबकि घुमारवीं उपमंडल का पहला क्लस्टर है।
इस बीच किसान बहुफसली खेती (मल्टी क्रॉप) के तहत लहसुन, प्याज, मिर्च, गेहूं इत्यादि की फसलें भी तैयार कर रहे हैं, जिससे उन्हें न केवल अतिरिक्त आमदन होगी, बल्कि क्लस्टर में स्थापित जापानी फल के पौधों का बेहतर पोषण भी हो सकेगा।
क्या कहते हैं किसान
इस संबंध में लाभान्वित किसान अंजलि ठाकुर का कहना है कि बागवानी विभाग के अंतर्गत एचपी शिवा परियोजना के माध्यम से उन्हें जापानी फल का बागीचा तैयार करने का अवसर मिला है। पहले यह जमीन बेकार पड़ी थी, लेकिन अब जापानी फल के पौधे रोपित हो जाने से जहां भविष्य में बेहतर आमदनी होने की उम्मीद है तो वहीं सिंचाई के लिए पानी की सुविधा प्राप्त हो जाने से इस समस्या का भी समाधान हुआ है। उन्होंने अपनी जमीन में 235 जापानी फल के पौधे रोपित किये हैं।
इसी तरह लाभान्वित किसान राजकुमारी का कहना है कि पहले जमीन में आवारा पशुओं एवं जंगली जानवरों के आंतक के कारण न केवल फसलों को भारी नुक्सान होता था बल्कि जमीन को बंजर छोड़ दिया था, लेकिन अब एचपी शिवा परियोजना के माध्यम से जापानी फल के पौधे रोपित होने तथा बाड़बंदी के कारण अब उन्हें पारंपरिक फसलों का भी लाभ मिलने लगा है तथा भविष्य में जापानी फल उनकी आर्थिकी को मजबूती प्रदान करेगा।
इसी तरह लाभान्वित किसान पवन कुमार का कहना है कि पौधों की देखरेख, दवाई इत्यादि की तकनीकी जानकारी बागवानी विभाग के अधिकारियों के माध्यम से उन्हें नियमित प्राप्त हो रही है। उनका कहना है कि आगामी 5-6 वर्षों के उपरांत इस बागीचे से सेब की तरह जापानी फल से भी अच्छी आमदनी प्राप्त होगी, जिससे आर्थिक स्थिति बेहतर होने की उम्मीद जताई।
सभी लाभांवित किसानों ने एचपी शिवा परियोजना के माध्यम से जापानी फल का बागीचा रोपित करने और पौधों की सुरक्षा के लिए बाड़बंदी के साथ-साथ सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध करवाने के लिए प्रदेश सरकार का आभार जताया।
क्या कहते हैं अधिकारी
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि घुमारवीं उपमंडल के लंझता में एचपी शिवा परियोजना के माध्यम से पहली बार जापानी फल का बगीचा रोपित किया है। इस बगीचे से अगले तीन वर्षों के उपरांत बेहतर उत्पादन होने की उम्मीद है, जिससे इस क्षेत्र के लगभग तीन दर्जन किसान लाभान्वित होंगे।
उनका कहना है कि तैयार उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए लाभान्वित किसानों की एक समिति कम्युनिटी हॉर्टिकल्चर प्रोड्यूस मार्केटिंग एजेंसी गठित की गई है। इस समिति के माध्यम से विपणन की सभी संभावनाओं पर कार्य करते हुए किसानों को उत्पाद के अच्छे दाम प्राप्त हों कार्य किया जाएगा।
उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार का कहना है जिला बिलासपुर में जापानी फल का कलस्टर आने वाले समय में ग्रामीणों की आर्थिकी को मजबूती प्रदान करने में अहम साबित होगा। उन्होंने किसानों एवं बागवानों से सरकार की विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों का लाभ उठाने का आह्वान किया है, ताकि उनकी आर्थिकी को अतिरिक्त बल प्रदान किया जा सके।
एचपी शिवा परियोजना एक नजर में
हिमाचल प्रदेश में एचपी शिवा परियोजना लगभग 1 हजार 292 करोड़ रूपये की लागत से प्रदेश के बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, मंडी, सोलन, सिरमौर और ऊना जिलों के 52 विकास खंडों में चरणबद्ध तरीके से लागू की जा रही है। इस परियोजना के माध्यम से लगभग 6 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में 400 कलस्टर विकसित किए जा रहे हैं, जिससे लगभग 15 हजार किसान परिवार सीधे लाभान्वित होंगे और किसानों को सब ट्रापिकल फलों जैसे मीठा संतरा, अमरूद, अनार, लीची, आम, पलम, जापानी फल इत्यादि की आधुनिक, व्यावसायिक तथा मार्केट आधारित खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
प्रदेशभर में अब तक लगभग एक हजार 140 हेक्टेयर क्षेत्र में फलदार पौधों का रोपण सफलतापूर्वक किया गया है। इस परियोजना के माध्यम से अब तक लगभग 330 करोड़ रूपये व्यय किए जा चुके हैं और वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लगभग 325 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है।
