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सरहद पर तैनात जवानों की कलाई नहीं रहेगी सूनी, राजगढ़ से भेजी गईं छह हजार राखियां

रक्षाबंधन पर्व को लेकर राजगढ़ की महिलाओं ने देश की सरहदों पर तैनात सैनिकों के प्रति स्नेह और सम्मान की अनूठी मिसाल पेश की है।

राजगढ़ : रक्षाबंधन पर्व को लेकर राजगढ़ की महिलाओं ने देश की सरहदों पर तैनात सैनिकों के प्रति स्नेह और सम्मान की अनूठी मिसाल पेश की है। सैनिक एकता महिला ग्रुप राजगढ़ ने ‘एक राखी सैनिक के नाम’ अभियान के तहत आम लोगों के सहयोग से करीब छह हजार राखियां देश की अलग-अलग सैन्य यूनिटों को डाक के माध्यम से भेजी हैं।

खास बात यह है कि यह अभियान लगातार दूसरे वर्ष चलाया जा रहा है। पिछले वर्ष भी महिला ग्रुप की ओर से करीब चार हजार राखियां सैनिकों को भेजी गई थीं। महिलाएं सोलन पहुंची थीं और वहां जवानों की कलाइयों पर स्वयं राखियां बांधकर उनके प्रति स्नेह और सम्मान प्रकट किया था। इस वर्ष लोगों के सहयोग से अभियान को और व्यापक रूप दिया गया है।

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ग्रुप की अध्यक्ष सरोज ठाकुर ने बताया कि ‘एक राखी सैनिक के नाम’ अभियान का उद्देश्य यह संदेश देना है कि रक्षाबंधन के दिन देश की रक्षा में तैनात किसी भी सैनिक की कलाई सूनी न रहे। उन्होंने बताया कि इस बार करीब छह हजार राखियां तैयार कर आधा दर्जन से अधिक सैन्य यूनिटों को डाक के माध्यम से भेजी गई हैं।

उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष अभियान की शुरुआत पर क्षेत्रवासियों का भरपूर सहयोग मिला था। इस बार भी लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लेते हुए सैनिकों के लिए राखियां उपलब्ध करवाने में योगदान दिया।

सरोज ठाकुर ने कहा कि देश की सीमाओं पर तैनात सैनिक कठिन परिस्थितियों में रहकर देश की सुरक्षा करते हैं। जब देशवासी अपने परिवारों के साथ त्योहार मनाते हैं, उस समय जवान सरहद पर अपनी ड्यूटी निभा रहे होते हैं। ऐसे में राखी के माध्यम से सैनिकों तक यह संदेश पहुंचाने का प्रयास है कि देश की बहनें और माताएं उनके साथ खड़ी हैं।

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उन्होंने कहा कि राखी महज एक धागा नहीं, बल्कि विश्वास, सुरक्षा, स्नेह और रिश्ते का प्रतीक है। इसी भावना को देश की रक्षा करने वाले जवानों तक पहुंचाने के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है। अभियान में किसी एक परिवार या संस्था के बजाय पूरे क्षेत्र के लोगों की भागीदारी देखने को मिल रही है।

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