
हमीरपुर : हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2023 और 2025 के दौरान कहर बरपाकर गई बरसात के गहरे जख्मों पर मरहम लगाने और पूरी तरह उजड़ चुके परिवारों को फिर से बसाने के लिए मुख्यमंत्री ने बेहद कठिन आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद विशेष आपदा राहत पैकेज जारी करके पूरे देश में एक अनुकर्णीय उदाहरण प्रस्तुत किया था और इसी पैकेज के कारण आज प्रदेश के हजारों परिवार न केवल आपदा से उबर चुके हैं, बल्कि उनके आशियाने भी फिर से बनकर तैयार हुए हैं।
वर्ष 2025 की बरसात जिला हमीरपुर के भोरंज उपमंडल के गांव भ्याड़ के करतार चंद के परिवार के लिए भी एक ऐसी भीषण आपदा लेकर आई कि पूरे परिवार को घनघोर अंधेरी रात में भारी बारिश के बीच जैसे-तैसे भागकर जान बचानी पड़ी और किसी दूसरे के घर में शरण लेनी पड़ी। सुबह लौटकर आए तो देखा कि मकान मलबे के ढेर में तबदील हो चुका था। मलबे के ढेर से थोड़ा-बहुत सामान निकालने के बाद करतार चंद और उनके परिजनों को रहने के लिए छत की तलाश थी। दिहाड़ी-मजदूरी से अपनी पत्नी, बेटे और बेटी का पालन-पोषण करने वाले करतार चंद को पुनर्वास की कोई भी उम्मीद नजर नहीं आ रही थी।
ऐसे हालात में प्रदेश सरकार का विशेष आपदा राहत पैकेज करतार चंद के परिवार के लिए बहुत बड़ा सहारा साबित हुआ। इस पैकेज के तहत करतार चंद को न केवल फौरी राहत राशि और आवश्यक सामान मिला, बल्कि परिवार को किराये के मकान में रहने के लिए भी अलग से राशि मिली। इसके बाद मकान के पुनर्निर्माण के लिए भी सात लाख रुपये की राशि मंजूर हो गई।
इस पैकेज की चार लाख रुपये की पहली किश्त और अपनी मेहनत की कमाई से करतार चंद ने मकान का निर्माण शुरू किया। कुछ महीनों में ही उनका मकान का ढांचा खड़ा हो गया। अब फीनिशिंग का कार्य चल रहा है।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का आभार व्यक्त करते हुए करतार चंद ने बताया कि अगर विशेष आपदा राहत पैकेज न होता तो उनके परिवार की न जाने क्या हालत होती? करतार चंद की बेटी सीमा देवी ने बताया कि आपदा के उस बुरे वक्त की याद करते हुए वे आज भी सिहर उठते हैं, लेकिन विशेष आपदा राहत पैकेज के कारण आज उनके मकान का पुनर्निर्माण संभव हुआ है और उन्हें छत नसीब हुई है।