
शिमला : जुन्गा तहसील के ट्राई गांव में आयोजित शिवलिंग प्राण प्रतिष्ठा एवं स्थापना समारोह हर-हर महादेव के जयघोष के बीच संपन्न हुआ। पांच दिन तक चले इस धार्मिक आयोजन में श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। समारोह में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सामाजिक समरसता का संदेश भी दिया गया।
नवनिर्मित शिवालय को क्षेत्र में सर्वजन आस्था के केंद्र के रूप में स्थापित किया गया है। मंदिर में सभी जाति-वर्ग और समुदाय के लोगों को भगवान शिव के दर्शन और अपनी श्रद्धानुसार पूजा-अर्चना करने की स्वतंत्रता होगी। आयोजकों का कहना है कि मंदिर के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में चली आ रही भेदभावपूर्ण परंपराओं को समाप्त कर सामाजिक एकता का संदेश देने का प्रयास किया गया है।
शिवलिंग प्राण प्रतिष्ठा का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा से हुआ। क्षेत्र की करीब 300 महिलाओं ने इसमें भाग लिया और गिरि नदी से पवित्र जल लेकर मंदिर परिसर तक पहुंचीं। इसके बाद पांच दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान विधि-विधान से संपन्न करवाए गए।
आचार्य सुमित भारद्वाज के नेतृत्व में चार अन्य कर्मकांड विशेषज्ञ पंडितों ने प्राण प्रतिष्ठा की रस्में पूरी करवाईं। इस दौरान शिवलिंग की पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ नगर परिक्रमा भी करवाई गई। नगर परिक्रमा में बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु शामिल हुए।
समारोह के समापन पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें जुन्गा क्षेत्र के अलावा पड़ोसी सिरमौर और सोलन जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और प्रसाद ग्रहण किया।
मंदिर के संस्थापक सत्यपाल ठाकुर और उनकी धर्मपत्नी विषमा ठाकुर ने बताया कि उनकी स्वर्गीय माता की लंबे समय से शिव मंदिर निर्माण की इच्छा थी। उनकी इस इच्छा को पूरा करने का अवसर मिलने पर उन्होंने मंदिर का निर्माण करवाया। उन्होंने बताया कि मंदिर में स्थापित शिवलिंग मध्यप्रदेश के नर्मदा क्षेत्र से लाया गया है।
सत्यपाल ठाकुर ने कहा कि मंदिर निर्माण का उद्देश्य केवल धार्मिक आस्था का केंद्र तैयार करना नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और समरसता को बढ़ावा देना भी है। उन्होंने कहा कि मंदिर में बिना किसी भेदभाव के हर व्यक्ति भगवान शिव के दर्शन कर सकेगा।
मंदिर निर्माण और महायज्ञ के आयोजन में उनके ज्येष्ठ भ्राता जातीराम, प्रताप सिंह, वीरेंद्र कुमार और तारा दत्त सहित ग्रामीणों ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया।