
श्री रेणुकाजी : डाक विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करने वाला एक मामला हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर में सामने आया है। हैरानी इस बात की है कि डाक विभाग की कथित लापरवाही से एक डेढ़ किलोमीटर दूर भेजी जाने वाली चिट्ठी को पहुंचने में पूरे 18 दिन लग गए। ये चिट्ठी पहले तो गलत एड्रेस पर सिरमौर के ही दूरदराज क्षेत्र भेजी गई, जहां से उसकी वापसी हुई।
मामला श्री रेणुकाजी क्षेत्र का है, जहां ददाहू डाकघर से महज एक से डेढ़ किलोमीटर दूर गांव बैडोन के लिए भेजी गई चिट्ठी सही पते पर पहुंचने के बजाय करीब 18 दिन तक अलग-अलग डाकघरों के बीच घूमती रही। आखिरकार 24 अगस्त को यह पत्र संबंधित व्यक्ति इंद्र प्रकाश गोयल को मिल पाया।
जानकारी के अनुसार 6 अगस्त 2026 को ददाहू पोस्ट ऑफिस से इंद्र प्रकाश गोयल के नाम एक पत्र भेजा गया था। पत्र पर बैडोन गांव का सही पता दर्ज था और इसे डाक विभाग के आधिकारिक लिफाफे में भेजा गया था। बैडोन गांव ददाहू से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

बताया गया कि सही पता होने के बावजूद पत्र बैडोन पहुंचने के बजाय उदैना कठवार, तहसील कमरऊ पहुंच गया। वहां डाकिए ने जब पत्र पर लिखे नाम और पते की जांच की तो उदैना कठवार में इंद्र प्रकाश गोयल नाम का कोई व्यक्ति नहीं मिला। इसके बाद डाकिए ने पत्र पर टिप्पणी लिखकर स्पष्ट किया कि इस नाम का व्यक्ति यहां नहीं रहता और पत्र बैडोन गांव का है, इसलिए इसे संबंधित पते पर वितरित किया जाए।
इसके बाद पत्र उदैना कठवार से वापस भेजा गया और 24 अगस्त को बैडोन गांव में इंद्र प्रकाश गोयल को सौंपा गया। इस तरह करीब एक किलोमीटर की दूरी तय करने वाले पत्र को अपने गंतव्य तक पहुंचने में 18 दिन लग गए।
हैरानी की बात यह है कि इंद्र प्रकाश गोयल का गृह डाकघर भी ददाहू ही है और पत्र भी ददाहू डाकघर से ही उनके नाम भेजा गया था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि सही पता दर्ज होने के बावजूद पत्र उदैना कठवार कैसे पहुंच गया और इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है।
यह मामला डाक विभाग की कार्यप्रणाली और डाक वितरण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना होगा कि विभाग इस मामले में कोई जांच या कार्रवाई करता है या नहीं।
