
नाहन/पांवटा साहिब : IIM सिरमौर के छात्र प्रारब्ध शुक्ला की संदिग्ध मृत्यु के मामले की जांच अब विशेष जांच दल (SIT) करेगा। पुलिस अधीक्षक सिरमौर ने मामले की गंभीरता और मृतक के परिजनों की मांग को देखते हुए SIT का गठन किया है। SDPO पांवटा साहिब मानवेंद्र सिंह ठाकुर टीम की कमान संभालेंगे।
पुलिस के अनुसार, 22 अगस्त को पुलिस थाना माजरा में आईआईएम सिरमौर के मृतक छात्र प्रारब्ध शुक्ला के पिता अनुपम शुक्ला निवासी जबलपुर, मध्यप्रदेश की शिकायत पर केस दर्ज किया गया था। शिकायत में उन्होंने बेटे की संदिग्ध मृत्यु को लेकर लापरवाही, सूचना छिपाने, अपर्याप्त निगरानी तथा साथी छात्रों और संस्थान के प्रशासन पर धमकाने एवं मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं।
शिकायतकर्ता ने मामले की जांच वरिष्ठ अधिकारी की निगरानी में SIT से करवाने की मांग की थी। इसके बाद पुलिस अधीक्षक सिरमौर ने विशेष जांच दल गठित किया।
SIT में SHO माजरा SI कुलदीप सिंह, जांच अधिकारी ASI आशीष कुमार, HC इंद्रजीत, साइबर सेल नाहन के प्रभारी HC रोहित, HC कमाल खान और आरक्षी अशोक कुमार को सदस्य बनाया गया है।
पुलिस के मुताबिक SIT मामले की वैज्ञानिक, निष्पक्ष और गहन जांच करेगी। शिकायत में लगाए गए आरोपों के साथ-साथ संस्थान के रवैये की भी गहनता से जांच की जाएगी।
बता दें कि प्रारब्ध शुक्ला की मौत के मामले में सोमवार को नाहन में उसके परिजनों ने पत्रकार वार्ता कर आईआईएम सिरमौर प्रबंधन पर कई गंभीर आरोप लगाए। प्रारब्ध के पिता अनुपम शुक्ला और चाचा श्याम शुक्ला ने आरोप लगाया कि प्रबंधन ने घटना से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां परिजनों और पुलिस से साझा नहीं कीं। उन्होंने सवाल उठाया कि घटना से कुछ दिन पहले प्रारब्ध द्वारा कलाई पर चोट पहुंचाने की जानकारी होने के बावजूद इसकी सूचना पुलिस और परिजनों को क्यों नहीं दी गई?

परिजनों ने यह भी सवाल उठाया कि जब प्रारब्ध परीक्षा देने नहीं पहुंचा तो संस्थान की ओर से इसकी जानकारी परिजनों को क्यों नहीं दी गई? उन्होंने आरोप लगाया कि संस्थान की ओर से घटनास्थल से जुड़े कई पहलुओं की जानकारी स्पष्ट नहीं की गई। परिजनों ने कमरे से डस्टबिन सहित कुछ सामान नहीं मिलने और घटना में इस्तेमाल बताई जा रही चुनरी को लेकर भी सवाल उठाए।
परिजनों ने आरोप लगाया कि प्रारब्ध के शरीर पर चोटों के निशान थे और इसलिए वे उसकी मौत को लेकर आशंकित हैं। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि वर्ष 2025 में कुछ छात्रों के साथ प्रारब्ध का विवाद हुआ था, जिसके बाद उसके साथ संस्थान में व्यवहार को लेकर समस्याएं बनी रहीं। उन्होंने दावा किया कि पुलिस के कैंपस पहुंचने के बाद बीएमसी थर्ड ईयर के छात्रों को एक सप्ताह के लिए घर भेज दिया गया।
इसके अलावा परिजनों ने सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि संस्थान के एक अधिकारी ने छात्रों से मामले को लेकर पुलिस को जानकारी न देने की बात कही थी। परिजनों का कहना है कि उनके पास इस संबंध में अन्य सामग्री भी है, जिसे जांच एजेंसी को उपलब्ध करवाया जा रहा है।
हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। बहरहाल, मामले की निष्पक्ष और गहन जांच के लिए परिजनों ने SIT गठित करने की मांग की थी तथा आगे सीबीआई जांच करवाने की भी मांग उठाई थी।
एसपी सिरमौर एनएस नेगी ने बताया कि मामले की गंभीरता और परिजनों की मांग को देखते हुए SIT का गठन कर दिया है। टीम मामले से जुड़े सभी पहलुओं, परिजनों की शिकायतों और संस्थान के रवैये की भी जांच करेगी।
