नाहन : जाने-पहचाने शिक्षाविद, पूर्व पार्षद एवं समाजसेवी दलीप सिंह वर्मा का शुक्रवार को निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही नाहन शहर में शोक की लहर दौड़ गई है। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे दलीप सिंह वर्मा ने जीवन के अंतिम समय तक समाज और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से अपना जुड़ाव बनाए रखा। उनके निधन को शहर ने एक ऐसे सामाजिक कार्यकर्ता की विदाई के रूप में देखा है, जिसने सेवानिवृत्ति के बाद भी समाजसेवा को अपने जीवन का हिस्सा बनाए रखा।
दलीप सिंह वर्मा पिछले लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। गले में दिक्कत के कारण वह काफी समय से बोल नहीं पा रहे थे। अंतिम दिनों में पेट से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं ने भी उन्हें घेर लिया था। बीमारी की इस कठिन अवस्था में उनकी बहू और पोते ने अंतिम समय तक उनकी सेवा की।
शिक्षा विभाग में लंबे समय तक सेवाएं देने के बाद सेवानिवृत्त हुए दलीप सिंह वर्मा ने आराम की जिंदगी चुनने के बजाय समाजसेवा का रास्ता अपनाया। वह पीटीआई एसोसिएशन, कोली समाज, अध्यापक संघ और नागरिक सभा नाहन जैसी संस्थाओं से जुड़े रहे तथा कई संस्थाओं में महासचिव की जिम्मेदारी संभाली। अजीत को-ऑपरेटिव सोसायटी से भी उनका लंबे समय तक जुड़ाव रहा।
वार्ड नंबर एक निवासी दलीप सिंह वर्मा नगर परिषद नाहन के पार्षद भी रह चुके थे। सामाजिक सरोकारों से जुड़े रहने के कारण शहर के विभिन्न वर्गों में उनकी पहचान बनी हुई थी। सेवानिवृत्ति के बाद भी सामाजिक संस्थाओं में सक्रिय रहकर उन्होंने लोगों से अपना संपर्क बनाए रखा।
डीएफओ के पद से सेवानिवृत्त एवं प्रसिद्ध लेखक-साहित्यकार दीनदयाल वर्मा ने दलीप सिंह वर्मा के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पुंडीर लंबे समय तक समाजसेवा के कार्यों से जुड़े रहे और सेवानिवृत्ति के बाद भी विभिन्न संस्थाओं में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते रहे।
दीनदयाल वर्मा ने उनके व्यक्तित्व को याद करते हुए कहा कि नाहन शहर की सड़कों पर दलीप सिंह वर्मा अक्सर अपने स्कूटर पर नजर आते थे। सामाजिक गतिविधियों में उनकी सक्रियता और लोगों के साथ उनका जुड़ाव उनकी पहचान का हिस्सा था। उन्होंने कहा कि समाज के लिए किए गए उनके उल्लेखनीय कार्यों के कारण दलीप सिंह पुंडीर को लंबे समय तक याद किया जाएगा।
दलीप सिंह वर्मा का निधन नाहन शहर के सामाजिक और शैक्षणिक क्षेत्र के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। शिक्षक के रूप में सेवाएं देने से लेकर सामाजिक संस्थाओं में जिम्मेदारियां निभाने तक उनका जीवन समाज से जुड़ाव की मिसाल रहा। उनके निधन से शहर ने एक ऐसे व्यक्तित्व को खो दिया, जिसकी मौजूदगी सामाजिक गतिविधियों में हमेशा महसूस होती रही।
