शिमला : हिमाचल प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून शनिवार को पूरी तरह विदा हो गया। इस बार मानसून की विदाई सामान्य तारीख 25 सितंबर के मुकाबले करीब 8 दिन देरी से हुई।
मौसम विभाग की ओर से जारी मानसून रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष प्रदेश में मानसूनी बादलों की बेरुखी साफ देखने को मिली। हालांकि, प्रदेश में मानसून का मिजाज हर साल बदल रहा है।
इस बार पूरे मानसून सीजन में प्रदेश में 652.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य 734.4 मिलीमीटर के मुकाबले 11 प्रतिशत कम है। मौसम विभाग के अनुसार 1901 से अब तक के 125 वर्षों में यह प्रदेश में मानसून सीजन की 41वीं सबसे कम बारिश रही।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के स्थानीय केंद्र के अनुसार इस साल मॉनसून 30 जून को हिमाचल पहुंचा और 1 जुलाई तक पूरे प्रदेश में फैल गया। इसका सामान्य आगमन 25 जून को होता है, यानी इस बार मानसून करीब सात दिन की देरी से पहुंचा था।
जिलावार देखें तो किन्नौर, ऊना, बिलासपुर, कुल्लू, चंबा, कांगड़ा, मंडी, शिमला, सिरमौर और सोलन में मानसून के दौरान बारिश सामान्य रही। वहीं हमीरपुर में बारिश सामान्य से कम और लाहौल-स्पीति में बहुत कम रही।
1922 में हुई थी रिकॉर्ड 1314.6 मिमी बारिश
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1901 से 2026 के बीच हिमाचल में मॉनसून सीजन की सबसे अधिक बारिश 1922 में दर्ज की गई थी। उस साल प्रदेश में 1314.6 मिलीमीटर बारिश हुई थी। इसके मुकाबले इस साल का आंकड़ा 652.3 मिलीमीटर रहा।
2025 में रिकॉर्ड 1022.5 मिमी बारिश दर्ज की गई थी, जबकि साल 2020 में 567.4 मिलीमीटर बारिश के साथ राज्य को सूखे जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा था। ऐसे में मौसम में साल दर साल बदलाव देखने को मिल रहा है।
अगस्त में कई बार तेज हुई मानसून गतिविधि
इस अगस्त के दौरान प्रदेश में कई दिनों तक कहीं-कहीं से लेकर काफी व्यापक बारिश दर्ज की गई। 5, 7, 11, 19 और 31 अगस्त को मानसून गतिविधियां तेज रहीं। वहीं 2, 3, 9, 13, 14, 21, 25, 27, 28, 29 और 30 अगस्त को मॉनसून गतिविधि कमजोर रही।
अगस्त में कई जिलों में भारी बारिश
4 अगस्त को सिरमौर और बिलासपुर के कुछ हिस्सों में बहुत ज्यादा बारिश हुई। 5 अगस्त को सिरमौर और ऊना, 15 अगस्त को कांगड़ा तथा 19 अगस्त को ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर और कांगड़ा जिलों में कुछ स्थानों पर बहुत ज्यादा बारिश दर्ज की गई।
मौसम में उतार-चढ़ाव जारी
हिमाचल प्रदेश में मानसून का मिजाज हर साल बदल रहा है। मौसम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले 12 वर्षों (2015 से 2026) के दौरान प्रदेश में बारिश का मिला-जुला और कई बार उतार-चढ़ाव भरा दौर देखने को मिला है।
