बिलासपुर : इस बार भी मत्स्य पालन विभाग ने प्रदेश के बड़े जलाश्यों में मछली उत्पादन को बढ़ावा देने और स्थानीय मछुआरों की आजीविका को सुदृढ़ करने के दृष्टिगत मछली बीज डालने का कार्य शुरू कर दिया है।
इसकी शुरूआत बिलासपुर के लुहणू से की गई। इस दौरान विभाग द्वारा ठेकेदार के माध्यम से पश्चिम बंगाल कोलकता से मंगवाई गई उच्च गुणवत्तायुक्त कतला और सिल्वर कार्प मछलियों के 2 लाख 5 हजार 866 उंगलिकाओं को गोविंद सागर झील में डाला गया है।
इस बात की पुष्टि करते हुए निदेशक मत्स्य पालन विभाग ओम कांत ठाकुर ने कहा कि विभाग प्रतिवर्ष प्रदेश के बडे़ जलाश्यों गोविंद सागर, पोंगडैम, कोलडैम, चमेरा डेम इत्यादि में प्रतिवर्ष मछलियों का बीज डालने का कार्य करता है, ताकि स्थानीय मछुआरों की आजीविका को मजबूत किया जा सके।
उन्होंने कहा कि इसकी शुरूआत गत दिवस बिलासपुर के लुहणू से की गई है। इस दौरान विभागीय अधिकारियों, मछुआरों एवं मत्स्य पालक समितियों के सदस्यों की उपस्थिति में कतला और सिल्वर कार्प मछलियों का बीज गोविंद सागर झील में डाला गया है।
उन्होंने कहा कि विभाग प्रतिवर्ष ठेकेदारों के माध्यम से उच्च गुणवत्तायुक्त मछलियों का बीज प्रदेश के बाहर से मंगवाता है तथा इसे चरणबद्ध तरीके से प्रदेश के विभिन्न जलाशयों में डाला जाता है।
इस कड़ी में कतला और सिल्वर कार्प मछलियों के बेहतर गुणवत्ता वाले मत्स्य बीज विशेष रूप से पश्चिम बंगाल से मंगवाए गए हैं, ताकि झील में मछली उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सके। गोविंद सागर झील सहित प्रदेश के बड़े जलाश्यों में हर वर्ष बेहतर गुणवत्ता के मत्स्य बीज डालने की मांग उठती रही है।
इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने इस बार मछुआरों और स्थानीय हितधारकों की अपेक्षाओं के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले मत्स्य बीज उपलब्ध करवाने का प्रयास किया है।
उन्होंने उम्मीद जताई है कि विभाग की इस पहल से आने वाले समय में गोविंद सागर झील में मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र के मछुआरों को भी आर्थिक लाभ होगा।
इस मौके पर विभाग के संयुक्त निदेशक पवन कुमार, सहायक निदेशक पंकज ठाकुर, नीतू सिंह, राकेश कुमार सहित विभाग के अन्य अधिकारियों सहित स्थानीय मछुआरे भी मौजूद रहे।
