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मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना बनी सहारा, इस जिले में 12.94 करोड़ रुपये खर्च, 791 अनाथ बच्चों को मिला लाभ

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के माध्यम से इस दिशा में सार्थक पहल की है।

मंडी : अनाथ बच्चों के जीवन में माता-पिता का साथ छूट जाने से पैदा होने वाली चुनौतियां केवल भावनात्मक नहीं होतीं, बल्कि कई बार शिक्षा, आर्थिक सुरक्षा, आवास और आत्मनिर्भर बनने की राह को भी कठिन बना देती हैं।

ऐसे बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें सम्मानजनक जीवन के अवसर उपलब्ध करवाना किसी भी संवेदनशील शासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के माध्यम से इस दिशा में सार्थक पहल की है।

‘सुक्खू सरकार’ ने अनाथ व बेसहारा बच्चों की देखभाल और पुनर्वास को एक व्यापक सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में आगे बढ़ाते हुए उनके लिए आर्थिक सहायता, उच्च शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, स्वरोजगार, आवास और विवाह अनुदान जैसी सुविधाओं का प्रावधान किया है।

योजना का उद्देश्य बच्चों को केवल तत्काल राहत प्रदान करना नहीं, बल्कि स्वयं पैरों पर खड़ा होने व भविष्य के फैसले लेने में सक्षम बनाने के अवसर उपलब्ध करवाना है।

तीन वर्षों में 791 बच्चों को मिले 12.94 करोड़ रुपये के लाभ
मंडी जिला में इस योजना के तहत व्यापक स्तर पर कार्य हुआ है। वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25, 2025-26 तथा 30 सितंबर, 2026 तक कुल 12 करोड़ 94 लाख 74 हजार 392 रुपये व्यय कर जिला में 791 अनाथ एवं अर्ध-अनाथ बच्चों को लाभान्वित किया गया है।

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आर्थिक मदद से सामाजिक सुरक्षा, दिवाली सहित त्यौहारों पर उत्सव भत्ता
पूर्ण अनाथ बच्चों को 4,000 रुपये प्रतिमाह सामाजिक सुरक्षा राशि प्रदान की जा रही है। बाल एवं बालिका देखभाल संस्थानों में रहने वाले बच्चों को निर्धारित श्रेणियों के अनुसार 1,000 रुपये और 2,500 रुपये प्रतिमाह सहायता दी जा रही है। मंडी जिला में इसके लिए 6.53 करोड़ से अधिक की राशि प्रदान की गई है।

साथ ही पोषण अनुदान के रूप में लगभग 51 लाख रुपए दिए गए। संस्थानों में रहने वाले बच्चों को दीपावली सहित अन्य त्यौहार मनाने के लिए प्रति बच्चा, प्रति त्यौहार 500 रुपये प्रदान किए जाते हैं। जिला में इस पर 33 लाख रुपए से अधिक की राशि वितरित की गई है।

शिक्षा और कौशल विकास को प्राथमिकता
बच्चों को शिक्षा और कौशल विकास के समान अवसर उपलब्ध करवाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। आर्थिक परिस्थितियों के कारण किसी बच्चे की पढ़ाई बाधित न हो और अपनी रुचि एवं योग्यता के अनुसार आगे बढ़ सके, इसके लिए उच्च शिक्षा तथा व्यावसायिक प्रशिक्षण में सहायता का प्रावधान है।

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जिला में 72 पूर्ण अनाथ बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए लगभग 36 लाख रुपए तथा 50 बच्चों को व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए 26 लाख रुपए से अधिक की सहायता प्रदान की गई है।

23 बच्चों को स्वरोजगार स्थापित करने के लिए 42.46 लाख रुपए प्रदान कर लाभान्वित किया गया है। ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ का दर्जा प्राप्त इन बच्चों को एक्सपोजर विजिट पर भी भेजा जाता है। जिला से हाल ही में एक दल बाघा बॉर्डर एवं अन्य महत्व के स्थलों का दौरा कर चुका है।

आवास और विवाह के लिए आर्थिक संबल
सुरक्षित भविष्य के लिए शिक्षा के साथ स्थायी आवास और जीवन के महत्वपूर्ण पड़ावों पर आर्थिक सहयोग भी जरूरी है। मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को गृह निर्माण और विवाह के लिए सहायता का प्रावधान है।

जिला में 65 लाभार्थियों को विवाह अनुदान के रूप में 1.29 करोड़ रुपए, जबकि 108 पात्र लाभार्थियों को मकान निर्माण के लिए 2.10 करोड़ रुपए का अनुदान दिया जा चुका है। कनैड क्षेत्र के गौरव ने गृह निर्माण व विवाह तथा सरकाघाट क्षेत्र के साहिल ने मकान बनाने के लिए अनुदान प्रदान करने पर मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू का आभार व्यक्त किया है।

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भूमिहीनों को भूमि आवंटन
योजना के अंतर्गत पूर्ण अनाथ बच्चों के लिए भूमि आवंटन का प्रावधान है। जिले में तीन भूमिहीनों को दो-दो बिस्वा भूमि प्रदान की गई है। भूमि उपलब्ध करवाने की यह पहल उन लाभार्थियों के लिए विशेष महत्व रखती है, जिनके पास अपना आवास बनाने के लिए जमीन नहीं है।

सामाजिक सुरक्षा से आत्मनिर्भरता तक
उपायुक्त अपूर्व देवगन ने बताया कि मंडी जिला में मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया है। पात्र बच्चों की पहचान और नियमित निगरानी के माध्यम से योजना के उद्देश्यों को धरातल पर उतारा जा रहा है।

मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना इस सोच पर आधारित है कि अनाथ बच्चों का कल्याण केवल वित्तीय सहायता तक सीमित नहीं होना चाहिए। उन्हें शिक्षा, कौशल, आवास और आजीविका के अवसरों से जोड़ना भी आवश्यक है, ताकि वे समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।

Aapki Baat News Desk
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