नाहन : हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर में स्थित डा. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल नाहन में जल्द ही एंटीबायोटिक पॉलिसी लागू होगी. इस पॉलिसी को बनाने की तैयारी शुरू हो गई है. इसके तहत मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर इंफेक्शन से ग्रस्त मरीजों को सिर्फ वही असरदार दवाई लिख पाएंगे, जिससे मरीज के ठीक होने की संभावना शत-प्रतिशत हो.
- फेसबुक पेज से जुड़िए :
https://www.facebook.com/aapkibaatnewsnetwork
इसके लिए मेडिकल कॉलेज प्रबंधन एक कमेटी बनाने जा रहा है, जिसमें फार्मा, क्लीनिकल और माइक्रोबायोलॉजी विभागों के सदस्यों को शामिल किया गया है. इस पॉलिसी के निर्माण के बाद डॉक्टर मरीजों को अलग-अलग दवाइयां नहीं लिख पाएंगे. सिर्फ वही दवाई मरीज को देनी होगी, जो पॉलिसी के अंतर्गत आती हो.
मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय पाठक ने बताया कि मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल प्रबंधन की हुई हॉस्पिटल इंफेक्शन कंट्रोल कमेटी में कुछ कई अहम निर्णय लिए गए. इसमें सबसे अहम फैसला एंटीबायोटिक पॉलिसी को लेकर किया गया.
उन्होंने बताया कि हॉस्पिटल इन्फेक्शन कंट्रोल कमेटी ने पाया कि अस्पताल में कई तरह के मरीज आते हैं, जिनमें इंफेक्शन के मामले भी अलग-अलग होते हैं. ऐसे मरीजों को इन्फेक्शन से बचाने के लिए कई बार ऐसी दवाइयां भी लिखी जाती है, जिनका असर मरीज पर नहीं होता. इसको ध्यान में रखते हुए कमेटी की एंटीबायोटिक पॉलिसी बनाने की सहमति बनी.
डॉ. पाठक ने बताया कि कमेटी ने यह भी पाया कि अस्पताल प्रबंधन के पास मरीजों के ब्लड सैंपल, ब्लड कल्चर और यूरीन कल्चर आदि का रिकार्ड उपलब्ध रहता है. साथ ही प्रबंधन के पास ये तमाम डाटा भी उपलब्ध है कि किस कीटाणु यानी इंफेक्शन के लिए कौन सी दवा ज्यादा असरदार है और कौन सी नहीं. ऐसे में अस्पताल प्रबंधन ने इस बैठक में एंटीबायोटिक पॉलिसी बनाने का निर्णय लिया है, ताकि मरीज को एक बार में ही वहीं दवाई दी जाए, जिससे उसके ठीक होने की संभावना पूरी की पूरी हो.
डॉ. पाठक ने कहा कि पॉलिसी लागू होने के बाद डॉक्टर मरीज को वहीं दवाई लिख पाएंगे, जिससे मरीज के ठीक होने की संभावना पूरी की पूरी हो. उन्होंने डॉक्टरों से भी अनुरोध किया कि वह पॉलिसी के दायरे में ही रहकर दवाइयां लिखें. जल्द ही मेडिकल कॉलेज में यह पॉलिसी लागू कर दी जाएगी.