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गेहूं की ये नई किस्में बढ़ाएंगी पैदावार, आपको रखेगी निरोगी, प्रतिकूल मौसम से लड़ने की है क्षमता और भी फायदे अनेक

धौलाकुआं : हिमाचल प्रदेश के किसानों को अब गेहूं की नई किस्मों के बीज उपलब्ध होंगे, जो न केवल पैदावार बढ़ाएंगे, बल्कि इनमें प्रतिकूल मौसम से लड़ने की भी भरपूर क्षमता होगी. यही नहीं ये किस्में बायोफोर्टिफाइड हैं, जो स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद ही पौष्टिक मानी गई हैं.

फिलहाल, इनका उत्पादन जिला सिरमौर के कृषि विज्ञान केंद्र सिरमौर (धौलाकुआं) के प्रदर्शन फार्म में किया गया है. इसकी कटाई के बाद इसका अन्वेषण किया जाएगा कि इसका उत्पादन कितनी मात्रा में हुआ है. इसके बाद कृषि विभाग के माध्यम से इन किस्मों का बीज किसानों को उसी मात्रा में आगामी रबी फसल के लिए उपलब्ध करवाया जाएगा.

दरअसल, कृषि विज्ञान केंद्र सिरमौर किसानों की आय को बढ़ाने के साथ-साथ प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के मकसद से नई-नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा है, ताकि विभिन्न फसलों के बीजों को पैदावार के बाद किसानों को मल्टीप्लाई किया जा सके. इसी मकसद से इस मर्तबा कृषि विज्ञान केंद्र ने डीबीडब्ल्यू सीरीज के गेहूं की 2 नई किस्मों को अपने प्रदर्शन फार्म में करीब 4 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रायोगिक तौर पर लगाया है. इसकी जल्द कटाई शुरू होगी.

आईसीआर करनाल ने लांच की ये दोनों किस्में
ये दोनों किस्में भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान केंद्र (आईसीआर) करनाल ने लांच की है. इसके साथ-साथ डीबीडब्ल्यू 303 सीरीज किस्म का गेहूं भी कृषि विज्ञान केंद्र में लगाया गया गया है. डीबीडब्ल्यू सीरीज आईसीआर करनाल ही लांच करता है. वहीं एचडी 3226 किस्म गेहूं के बीज की भी यहां पैदावार की गई है. ये सभी किस्में लगभग नई हैं, लेकिन 327 और 371 किस्मों को पहली बार यहां प्रायोगिक तौर पर उगाया गया है.

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इस वजह से पड़ी आवश्यकता
कृषि विज्ञान केंद्र सिरमौर के प्रभारी एवं प्रधान वैज्ञानिक डा. पंकज मित्तल ने बताया कि 2022 में अचानक मौसम में परिवर्तन के चलते तापमान में अत्यधिक बढ़ोतरी होने से गेहूं के उत्पादन में भारी कमी आई थी.

दो साल पहले गेहूं के उत्पादन में 30 से 35 फीसदी तक कमी दर्ज की गई थी. कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार गेहूं की पुरानी किस्मों में प्रतिकूल मौसम से लड़ने की क्षमता नहीं थी. इस वजह से उत्पादन में भारी गिरावट आई. इसी के मद्देनजर आईसीआर करनाल ने डीबीडब्ल्यू सीरिज की दो नई किस्मों को मौसम से लड़ने, अच्छी पैदावार, पौष्टिकता बढ़ाने के लिए इजाद किया गया.

धौलाकुआं में अभी तक के परिणाम उत्साहवर्धक
आईसीआर करनाल ने इन दोनों किस्मों का बीज विभिन्न कृषि विज्ञान केंद्रों को मुहैया करवाया, ताकि उत्पादन के दौरान इनकी मौसम से लड़ने की क्षमता को परखा जा सके. साथ ही पैदावार के बाद इनके बीजों की गुणवत्ता जांची जा सके.

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विशेषज्ञों ने पाया कि धौलाकुआं में इन किस्मों की पैदावार काफी अच्छी हुई है और अब कटाई के बाद इसकी पैदावार का अन्य किस्मों के मुकाबले अनुमान लगाया जाएगा. इसके बाद इसका बीज किसानों को आवंटित होगा. विशेषज्ञों ने बताया कि धौलाकुआं में अन्य किस्मों की अपेक्षा इन किस्मों के अभी तक के परिणाम उत्साहवर्धक है और अधिक बीज पैदावार की उम्मीद है.

क्या है बायोफोर्टिफाइड
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार बायोफोर्टिफाइड फसलें, वे फसलें होती हैं, जिनमें पोषक तत्वों की मात्रा ज्यादा होती है. इन फसलों को उगाने के लिए, पारम्परिक पौध प्रजनन, उन्नत कृषि पद्धतियों और आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया जाता है. बायोफोर्टिफाइड फसलों से पोषण की कमी को दूर किया जा सकता है. इसकी भी वैज्ञानिक पैदावार के बाद जांच करेंगे.

सोना-मोती गेहूं का भी प्रायोगिक उत्पादन
कृषि विज्ञान केंद्र सिरमौर में हजारों वर्ष पुरानी सोना-मोती गेहूं का प्रायोगिक उत्पादन भी किया गया है. चाहे डीबीडब्ल्यू या एचडी सीरीज की गेहूं की किस्में हो या फिर सोना मोती, इन सभी किस्मों की खासियत अलग-अलग हैं. सोना मोती गेहूं को हड़प्पा सभ्यताकालीन गेहूं माना जाता है, जो अन्य सभी गेहूं की किस्मों से काफी अलग हैं.

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इसका भी पहली बार कृषि विज्ञान केंद्र सिरमौर ने उत्पादन किया है. अब इन सभी किस्मों की पैदावार के बाद ही वैज्ञानिक इनकी गुणवत्ता, पौष्टिकता सहित अन्य मानकों का गहन अध्ययन करेंगे. इसके साथ-साथ किसानों को भी उपलब्ध करवाया जाएगा.

और क्या कहते हैं कृषि वैज्ञानिक?
कृषि विज्ञान केंद्र सिरमौर के प्रभारी एवं प्रधान वैज्ञानिक डा. पंकज मित्तल ने बताया कि प्रदर्शन फार्म में गेहूं की कई किस्में लगाई गई हैं. डीबीडब्ल्यू 327 और 371 नई किस्में हैं, जो अन्य किस्मों के मुकाबले बेहतर किस्म मानी गई हैं.

इनमें प्रतिकूल मौसम से लड़ने की क्षमता है और इस बार प्रदर्शन फार्म में भी इसे साफ तौर पर देखा और परखा गया. उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र नई-नई किस्मों के बीज एवं पौध उत्पादन द्वारा किसानों को सशक्त बनाने और देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है.

Hitesh Sharma
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हितेश शर्मा 'आपकी बात न्यूज़ नेटवर्क' के संस्थापक और मुख्य संपादक हैं। दो दशकों से भी अधिक लंबे अपने करिअर में, वे 'अमर उजाला' 'दैनिक भास्कर' दैनिक ट्रिब्यून, पंजाब केसरी और दिव्य हिमाचल जैसे प्रमुख प्रकाशनों में महत्वपूर्ण संपादकीय जिम्मेदारियां निभाई हैं। एक अनुभवी पत्रकार और पूर्व ब्यूरो प्रमुख के तौर पर, हितेश अपनी गहन ज़मीनी रिपोर्टिंग और नैतिक व प्रभावशाली पत्रकारिता के प्रति अपने अटूट समर्पण के लिए व्यापक रूप से सम्मानित हैं। वे जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग करने में विशेषज्ञता रखते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि हर कहानी को पूरी गहराई और ज़िम्मेदारी के साथ प्रस्तुत किया जाए।

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