Homeअंग्रेजी "टी" जो अब विलायत में "चाय" बनकर खूब टहल रही

अंग्रेजी “टी” जो अब विलायत में “चाय” बनकर खूब टहल रही

आजकल तो भारत की मसाला चाय दुनिया भर में मशहूर हो चुकी है. लंदन समेत कई देशों में "चाय" शब्द का मतलब ही भारतीय शैली की चाय हो गया है.चाय को दिया एक नया स्वाद भारत देश की जलवायु, देश-काल परिस्थितियों के अनुसार निसंदेह भारतीयों ने चाय बनाने का अपना अनूठा तरीका निकाला.

चंद्रकांत पाराशर:
लंदन की सड़कों पर भारतीय चाय की खुशबू खूब महक रही है. विलायत के शहरों में छोटी-बड़ी मार्केट में भारतीय परिवेश अनुसार बनी चाय यानी टी खूब प्रसिद्धि पा रही है. लंदन समेत कई देशों में “चाय” शब्द का मतलब ही भारतीय शैली की चाय हो गया है. भारतीयों ने चाय को एक नया स्वाद है, जिसने दुनियाभर में अपनी अलग पहचान बना ली है. आइए जानते हैं लंदन में भारतीय चाय के इस जादू के पीछे की कहानी.
अकसर कहा जाता है कि चाय और राय… हर जगह सही नहीं मिलती. सच्च भी है. लेकिन, सुदूर विलायत के शहरों की छोटी-बड़ी मार्केट में भारतीय परिवेश अनुसार बनी चाय अर्थात ही न केवल खूब बिक रही, बल्कि प्रसिद्धि भी पा रही है. पहले यहां हाई वाइकॉम्ब, लंदन के रहवासियों से सुना था, ‘चायवाला’, चायपानी, कड़क चाय जैसे भारतीय हिन्दी शीर्षकों से रेस्तरां के नाम विलायत यानी लंदन में प्रायः मिल जाएंगे. यह भी अंग्रेजों के अंग्रेजी शब्द से निकल हिंदी भाषा की महानदी में तैरकर रोमन रूप में स्याद की दुनियां की वैतरणी को पार कर जाना चाहती हो.
मुझे तो एकबारगी ऐसा ही लगा जब खुद आकर उपरोक्त वर्णित जगहों यानी रेस्टोरेंट्स में भाय का स्वाद चखा. वैसे यह सिर्फ एक पेच ही नहीं है, बल्कि अपने आप में एक अनुभव है. आजकल तो भारत की मसाला चाय दुनिया भर में मशहूर हो चुकी है. लंदन समेत कई देशों में “चाय” शब्द का मतलब ही भारतीय शैली की चाय हो गया है.चाय को दिया एक नया स्वाद भारत देश की जलवायु, देश-काल परिस्थितियों के अनुसार निसंदेह भारतीयों ने चाय बनाने का अपना अनूठा तरीका निकाला.
उन्होंने चाय की पत्तियों को सीधे पानी पा दूध में उबालना पसंद किया, ना कि उबले हुए पानी में डालना. ब्रिटिशों से उन्होंने दूध और चीनी मिलाने का तरीका जरूर सीखा, लेकिन भारतीयों ने इसमें अपना बदलाव किया. भारतीय चाय विक्रेताओं ने चाय में स्थानीय मसाले डालकर इसका स्वाद और बढ़ा दिया.उन्होंने चाय को अदरक, इलायची, दालचीनी, लौंग और तेज पत्ते जैसी चीजों के साथ उबाला. शायद यही कारण है कि हमारी मसाला चाय दुनिया भर में मशहूर है. द चायवाला छपे कागज-प्लेट पर ही समोसा-चाट आदि सामग्री को चाय के साथ परोसकर और भी आकर्षक बनाते हैं.
क्या है चाय
चाय का वानस्पतिक या वैज्ञानिक नाम केमेलिया साइनेन्सिस (Camellia sinensis) होता है. विदित है पहले के जमाने में बाय पत्ती पर चाइना का ही आधिपत्य था. शुरू में अंग्रेजों ने अपने देश की ‘चाय-मांग” को ही पूरा करने के लिए भारत में इसका उत्पादन प्रारंभ किया था. भारत में जब चाय के बागान लग गए. तब भारत से अन्य देशों को चाय की पत्ती का निर्यात शुरू हुआ.
इतिहास बताता है कि चाइना ने कभी भी किसी अन्य देश को चाय के पौधे नहीं दिए, दुनिया का एकमात्र देश भारत ही था, जिसने अपने यहां तैयार चाय की पत्नी व पौधों को अन्य देशों में निर्यात किया.
जनपद सहारनपुर का नाम चाय उत्पादन के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज है.चाय एक सुगंधित पेय है, जो शरीर में स्फूर्ति पैदा करती है. एशियाई विशेषकर भारतीय नागरिकों ने यहां विलायत लंदन में भारतीय व्यंजनों को उनकी मूल आत्मा के साथ परोसकर अपने चाहने वालों का मन जीत लिया है.
 लेखकः चंद्रकांत पाराशर

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Hitesh Sharma
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हितेश शर्मा 'आपकी बात न्यूज़ नेटवर्क' के संस्थापक और मुख्य संपादक हैं। दो दशकों से भी अधिक लंबे अपने करिअर में, वे 'अमर उजाला' 'दैनिक भास्कर' दैनिक ट्रिब्यून, पंजाब केसरी और दिव्य हिमाचल जैसे प्रमुख प्रकाशनों में महत्वपूर्ण संपादकीय जिम्मेदारियां निभाई हैं। एक अनुभवी पत्रकार और पूर्व ब्यूरो प्रमुख के तौर पर, हितेश अपनी गहन ज़मीनी रिपोर्टिंग और नैतिक व प्रभावशाली पत्रकारिता के प्रति अपने अटूट समर्पण के लिए व्यापक रूप से सम्मानित हैं। वे जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग करने में विशेषज्ञता रखते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि हर कहानी को पूरी गहराई और ज़िम्मेदारी के साथ प्रस्तुत किया जाए।

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