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हिमाचल में सरकारी नौकरी पाने का तरीका बदला, अब 2 साल ‘ट्रेनी’, फिर पक्की नौकरी की गारंटी!

2 साल की अवधि पूरी होने के बाद ट्रेनी को योग्यता परीक्षा पास करनी होगी। इस परीक्षा को सफलतापूर्वक पास करने के बाद ही उन्हें नियमित सरकारी नियुक्ति मिलेगी। यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करेगी कि केवल योग्य और प्रतिबद्ध उम्मीदवार ही स्थायी सरकारी कर्मचारी बनें। नई भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण नीति का पूरी तरह से पालन किया जाएगा।

शिमला : हिमाचल प्रदेश में सरकारी नौकरी पाने का तरीका अब पूरी तरह से बदल गया है। राज्य सरकार ने ग्रुप-ए, बी और सी श्रेणी की भर्ती प्रक्रिया में एक बड़ा बदलाव करते हुए अब अनुबंध भर्तियों को समाप्त कर दिया है। इसकी जगह अब युवाओं को सीधे 2 साल की ‘ट्रेनी’ अवधि पर नियुक्त किया जाएगा। यह कदम युवाओं में जवाबदेही, प्रेरणा और व्यावसायिकता बढ़ाने के साथ-साथ प्रशासनिक ढांचे को और भी प्रभावी और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

कार्मिक विभाग द्वारा जारी नई अधिसूचना के अनुसार इस 2 साल की ट्रेनी अवधि को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद उम्मीदवारों को स्थायी सरकारी कर्मचारी बनने के लिए एक योग्यता परीक्षा पास करनी होगी। यह नई नीति उन लाखों युवाओं के लिए एक नई चुनौती और अवसर लेकर आई है, जो सरकारी सेवा में आना चाहते हैं।

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क्या है यह नई ‘ट्रेनी’ व्यवस्था?
इस नई व्यवस्था के तहत उम्मीदवारों का चयन खुली प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से होगा। चयनित उम्मीदवारों को शुरुआती 2 साल तक ‘ट्रेनी’ के रूप में अपनी सेवाएं देनी होंगी। इस दौरान उन्हें एक निर्धारित मासिक मानदेय मिलेगा।

ट्रेनी अवधि में क्या मिलेगा और क्या नहीं?
यह समझना महत्वपूर्ण है कि ट्रेनी श्रेणी में सेवाएं देने वालों को सरकारी कर्मचारी नहीं माना जाएगा। इसका मतलब है कि उन्हें सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाले नियमित लाभ जैसे पेंशन, सरकारी छुट्टियां और मेडिकल रीइंबर्समेंट जैसी सुविधाएं नहीं मिलेंगी।

हालांकि, उनके लिए कुछ राहतें भी हैं:
* स्वास्थ्य सुविधाएं: ट्रेनी, हिमकेयर और आयुष्मान भारत योजना जैसी स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं। * यात्रा भत्ता: विभागीय कार्य के लिए यात्रा करने पर उन्हें टी.ए. (यात्रा भत्ता) और डी.ए. (दैनिक भत्ता) का लाभ मिलेगा, जो न्यूनतम वेतनमान पर एक नियमित समकक्ष अधिकारी के समान दरों पर होगा।

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परमानेंट होने का रास्ता ‘योग्यता परीक्षा’ :
2 साल की अवधि पूरी होने के बाद ट्रेनी को योग्यता परीक्षा पास करनी होगी। इस परीक्षा को सफलतापूर्वक पास करने के बाद ही उन्हें नियमित सरकारी नियुक्ति मिलेगी। यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करेगी कि केवल योग्य और प्रतिबद्ध उम्मीदवार ही स्थायी सरकारी कर्मचारी बनें। नई भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण नीति का पूरी तरह से पालन किया जाएगा।

कौन सी भर्तियां इस दायरे से बाहर?
यह नई योजना सभी सरकारी भर्तियों पर लागू नहीं होगी। कुछ महत्वपूर्ण श्रेणियां इस दायरे से बाहर रखी गई हैं, जिनमें * हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (HPAS) से भरे गए पद * सिविल जज * मेडिकल कॉलेजों में सहायक व एसोसिएट प्रोफेसर * आयुष विभाग में विभिन्न विषयों के प्रोफेसर * वन विभाग में ए.सी.एफ. (सहायक वन संरक्षक) * नायब तहसीलदार * अनुभाग अधिकारी * सहायक राज्य कर एवं आबकारी अधिकारी * पुलिस कांस्टेबल शामिल हैं।

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Hitesh Sharma
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हितेश शर्मा 'आपकी बात न्यूज़ नेटवर्क' के संस्थापक और मुख्य संपादक हैं। दो दशकों से भी अधिक लंबे अपने करिअर में, वे 'अमर उजाला' 'दैनिक भास्कर' दैनिक ट्रिब्यून, पंजाब केसरी और दिव्य हिमाचल जैसे प्रमुख प्रकाशनों में महत्वपूर्ण संपादकीय जिम्मेदारियां निभाई हैं। एक अनुभवी पत्रकार और पूर्व ब्यूरो प्रमुख के तौर पर, हितेश अपनी गहन ज़मीनी रिपोर्टिंग और नैतिक व प्रभावशाली पत्रकारिता के प्रति अपने अटूट समर्पण के लिए व्यापक रूप से सम्मानित हैं। वे जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग करने में विशेषज्ञता रखते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि हर कहानी को पूरी गहराई और ज़िम्मेदारी के साथ प्रस्तुत किया जाए।

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