हमारी भी सुनो… स्नातक की पढ़ाई कर रहे सैकड़ों बच्चों को नहीं मिला स्पैशल चांस, दांव पर भविष्य, उम्मीदें भी होने लगी अब धराशायी

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शिमला : हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई कर रहे अनुतीर्ण विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर लग गया है. दरअसल, दो दिन बाद परीक्षाएं शुरू हो रही हैं और ऐसे विद्यार्थियों को अब तक ये भी जानकारी नहीं है कि वह मौजूदा वर्ष (कक्षा) की परीक्षा दे पाएंगे भी या नहीं. ऐसा इसलिए क्योंकि ये विद्यार्थी पिछली कक्षाओं में तीन विषयों में अनुतीर्ण हुए हैं और इस समय अगली कक्षाओं में दाखिला लेकर परीक्षाओं की तैयारी करने में जुटे हैं.

इन बच्चों को अभी तक विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से पिछली कक्षा को उतीर्ण करने का कोई भी चांस नहीं दिया गया है. यदि इन्हें ये चांस मिलता है तो उन्हें पिछली कक्षा के सिर्फ वो तीन विषयों के पेपर देने होंगे, जिसमें वे अनुतीर्ण (फेल) हुए हैं. इसके साथ वह मौजूदा कक्षा की परीक्षाओं में भी बैठ सकते हैं. लेकिन, इस पर अभी तक विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्थिति साफ नहीं की है.

स्पैशल चांस न मिलने से इन विद्यार्थियों को पिछली कक्षा के सभी पेपर देने होंगे. जबकि, मौजूदा कक्षा की परीक्षा देने का उन्हें मौका ही नहीं मिलेगा. यानी उनके दो साल बर्बाद हो जाएंगे. लिहाजा, विद्यार्थी तनावपूर्ण स्थिति से गुजर रहे हैं. प्रदेश में ऐसे विद्यार्थियों का आंकड़ा सैकड़ों में हो सकता है.

ये विद्यार्थी इस पशोपेश में हैं कि उनकी ओर से बार-बार आवेदन किए जाने के बावजूद अभी तक विश्वविद्यालय की ओर से उन्हें एक भी मौका क्यों नहीं दिया गया है. हैरानी इस बात की भी है कि विश्वविद्यालय ने पुराने अनुतीर्ण विद्यार्थियों को गोल्ड चांज दिया है, लेकिन जो विद्यार्थी रेगुलर हैं, उनके भविष्य पर ध्यान नहीं दिया है.

ये विद्यार्थी अपने भविष्य को लेकर विश्वविद्यालय द्वारा तमाम नियमों के साथ हर तरह की फीस देने की हामी तक भर चुके हैं. ऐसे विद्यार्थियों का ये भी कहना है कि वे मौजूदा कक्षा में एमटीटी भी कर चुके हैं. वह पिछले वर्ष नवंबर माह से विश्वविद्यालय को स्पैशल चांस देने की गुहार लगाकर आवेदन कर चुके हैं. विश्वविद्यालय की साइट भी विद्यार्थियों के आवेदन को नहीं उठा रही है. ऐसे विद्यार्थियों में इस अनदेखी को लेकर गहरा रोष है. अब तक इस पर स्थिति स्पष्ट न होने और अपने भविष्य को अंधकार में डूबता देख विद्यार्थी भारी मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं.

इन विद्यार्थियों की मांग है कि उन्हें स्पैशल चांस के तहत कंसीडर करते हुए उन्हें एक बार जरूर मौका दिया जाए. बता दें कि बच्चों के भविष्य को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन बड़े दावे जरूर करता है, लेकिन उन्हें धरातल पर कितनी उत्सुकता से उतारता है, ये भी साफ दिखाई दे रहा है.

काबिले गौर हो कि जो विद्यार्थी पहले और दूसरे वर्ष में तीन-तीन विषयों में फेल हुए हैं, उन्हें स्पैशल चांस देने की मांग कई विद्यार्थी संगठनों की ओर से उठाई गई थी, जिस पर विश्वविद्यालय ने भी विचार करने की बात कही थी.

इसी उम्मीद पर अधिकतर फेल बच्चों ने अगली कक्षा में दाखिला लिया था. बावजूद इसके अभी तक विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस पर कोई फैसला नहीं लिया है. एचपीयू के परीक्षा नियंत्रक प्रो. श्यामलाल कौशल ने बताया कि विश्वविद्यालय अथॉरिटी ही इस पर फैसला लेती है. इसे लेकर अथॉरिटी से बात की जाएगी.

उधर, पीवीसी एचपीयू राजेंद्र वर्मा ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में नहीं था. यदि ऐसा है तो बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए प्रशासन जल्द कदम उठाएगा. उन्होंने ये भी कहा कि इस बारे वह परीक्षा नियंत्रक से बातचीत कर इसका समाधान निकालने का प्रयास करेंगे.