नाहन : ऐतिहासिक शहर नाहन में गत शुक्रवार को दो समुदायों के बीच पनपे तनाव के बाद अब आपसी भाईचारे की तस्वीर सामने आई है। रविवार को महर्षि वाल्मीकि जयंती पर निकलने वाली शोभायात्रा पुराने रूट से ही निकलेगी।
विधायक अजय सोलंकी की अध्यक्षता में पुलिस अधीक्षक कार्यालय के कांफ्रेंस हॉल में दोनों समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया। शोभायात्रा रविवार दोपहर बाद 2:30 बजे महर्षि वाल्मीकि मंदिर से शुरू होकर मोहल्ला गोबिंदगढ़ से होते हुए दिल्ली गेट पहुंचेगी।
बैठक में तय हुआ कि मोहल्ला गोबिंदगढ़ में सिख समुदाय के लोग शोभायात्रा का स्वागत करेंगे और दिल्ली गेट तक साथ चलेंगे। हालांकि, शुक्रवार को हुई घटना के बाद प्रशासन ने सुरक्षा की संवेदनशीलता को देखते हुए शोभायात्रा का रूट बदलने का निर्णय लिया था।
रविवार को दोनों समुदायों के लोगों की बातचीत के बाद पुराने रूट से ही शोभायात्रा निकालने पर सहमति बनी। इस फैसले को शहर में आपसी विश्वास और सौहार्द बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
इस बीच सिख समुदाय के कुछ युवाओं ने भी सकारात्मक पहल करते हुए विवाद के दौरान वाल्मीकि चौक पर हुई टूट-फूट की मरम्मत स्वयं करवाने का प्रस्ताव दिया है। इस पहल से दोनों समुदायों के बीच विश्वास बहाली की उम्मीद जगी है।
नाहन शहर की आपसी भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द की परंपरा को कायम रखने के लिए प्रशासन और दोनों पक्षों के प्रतिनिधि लगातार बातचीत कर रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
सिरमौर जिला मुख्यालय नाहन के महर्षि वाल्मीकि चौक पर 23 अक्तूबर को उस समय विवाद शुरू हुआ, जब सिख समुदाय के कुछ युवक पिछले वर्ष तूफान में टूटे स्वागत द्वार की मरम्मत के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान सेल्फी पॉइंट का निर्माण कर रहे वाल्मीकि समुदाय के लोगों के साथ किसी बात को लेकर बहस हो गई। देखते ही देखते विवाद झड़प और पथराव में बदल गया।
घटना में पुलिसकर्मियों सहित कई लोग घायल हुए, वाहनों को नुकसान पहुंचा और राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात भी प्रभावित हुआ। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने संबंधी कानून के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
24 अक्तूबर को जिला प्रशासन ने दोनों समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की थी। विधायक अजय सोलंकी ने भी घटना पर दुख जताते हुए लोगों से अफवाहों से दूर रहने और नाहन की सांप्रदायिक सौहार्द की परंपरा कायम रखने का आग्रह किया था।

