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हजारों साल की विरासत कहीं गुम न हो जाए! कुल्लू-लाहौल में छिपी पांडुलिपियों की खोज शुरू

देश की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने के लिए अब आम लोगों की भागीदारी भी अहम बनने जा रही है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित ज्ञान भारतम् राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण के तहत पांडुलिपियों से जुड़ी जानकारी जुटाने के लिए लोगों से सहयोग मांगा गया है।

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कुल्लू : देश की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने के लिए अब आम लोगों की भागीदारी भी अहम बनने जा रही है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित ज्ञान भारतम् राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण के तहत पांडुलिपियों से जुड़ी जानकारी जुटाने के लिए लोगों से सहयोग मांगा गया है।

इस सर्वेक्षण का उद्देश्य देशभर में बिखरी हुई अप्रकाशित पांडुलिपियों का संकलन, संरक्षण और अभिलेखीकरण सुनिश्चित करना है, ताकि भविष्य की पीढ़ियों के लिए इस धरोहर को सुरक्षित रखा जा सके। इसके तहत जिला कुल्लू और लाहौल-स्पीति के नागरिकों से विशेष अपील की गई है कि यदि किसी मंदिर, बौद्ध मठ, व्यक्ति, परिवार, संस्था या समुदाय के पास ऐसी पांडुलिपियां मौजूद हैं, जो अब तक सूचीबद्ध या पंजीकृत नहीं हुई हैं, तो उनकी जानकारी भाषा एवं संस्कृति विभाग के कार्यालय में अवश्य उपलब्ध करवाएं।

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इसके साथ ही ‘ज्ञान भारतम्’ मोबाइल ऐप और gyanbharatam.com के माध्यम से भी लोग ऑनलाइन इस सर्वेक्षण में भाग लेकर पांडुलिपियों का पंजीकरण कर सकते हैं। विभाग का मानना है कि जन-सहभागिता के बिना इस समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण संभव नहीं है, इसलिए सभी से इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की गई है।