होमHimachalWATCH PICS : आदिवासी मजदूर की ये बेटी कलाकृतियों से बढ़ा रही...

WATCH PICS : आदिवासी मजदूर की ये बेटी कलाकृतियों से बढ़ा रही अमीरों के ड्राइंग रूम की शोभा, प्रतिभा देख रह जाएंगे दंग

वह कहती हैं, "पेंटिंग एवं अन्य कलाएं आमतौर पर उन लोगों का शौक होती हैं जिन परिवारों में गरीबी नहीं होती. एक मजदूर का परिवार तो सिर्फ दो वक्त की रोटी जुटाने के संघर्ष में लगा रहता है. मल्होत्रा परिवार ने मुझे अपने सपनों में रंग भरने का मौका दिया. मैं घरेलू काम करने के बाद अपना पूरा समय कला के शौक को देती हूं."

शिमला|
आदिवासी मजदूर माता-पिता ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि उनकी चार संतानों में से एक बेटी कला के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाएगी. गरीबी और अभावों का वातावरण वनिता के सामने बड़ी चुनौती था. शिमला के एक कारोबारी के पास घरेलू सहायिका के रूप में कार्यरत यह बेटी अब अपने सपनों में रंग भर रही है. उसकी बनाई पेंटिंग एवं अन्य कलाकृतियां अमीर लोगों के ड्राइंग रूम की शोभा बढ़ा रही हैं.

झारखंड के गुमला जिले के गांव चुहरू के पुजार उरांव और राजकुमारी देवी की बेटी वनिता ने शिमला में ही होश संभाला, क्योंकि वर्षों पूर्व उसके माता-पिता मजदूरी के लिए यहां आ गए थे. राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल, ब्यूलिया से उसने 12वीं की परीक्षा पास की. बचपन से ही उसे चित्रकारी का शौक था, लेकिन महंगे रंग एवं अन्य सामग्री खरीद पाना उसके लिए संभव नहीं था. वह पढ़ाई जारी नहीं रख सकी और किसी के घर में काम करने लगी.Vanita, daughter of a tribal labourer, is creating art pieces

ये भी पढ़ें:  मंत्री के दौरे से नदारद रहना पड़ा महंगा, विभाग ने 3 अफसरों को थमाए कारण बताओ नोटिस

कोरोना के दौर में उसे शहर के कारोबारी पंकज मल्होत्रा के घर में काम करने का मौका मिला. इस परिवार ने उसकी कला की प्रतिभा को पहचान और प्रोत्साहन देना शुरू किया. घरेलू काम से फुर्सत मिलने के बाद वनिता पेंटिंग बनाती. बिहार की मधुबनी पेंटिंग, गुजरात व राजस्थान की लिप्पन आर्ट और तिब्बत की मंडला आर्ट भी उसकी पसंद का विषय बनी.

वह कहती हैं, “पेंटिंग एवं अन्य कलाएं आमतौर पर उन लोगों का शौक होती हैं जिन परिवारों में गरीबी नहीं होती. एक मजदूर का परिवार तो सिर्फ दो वक्त की रोटी जुटाने के संघर्ष में लगा रहता है. मल्होत्रा परिवार ने मुझे अपने सपनों में रंग भरने का मौका दिया. मैं घरेलू काम करने के बाद अपना पूरा समय कला के शौक को देती हूं.”Vanita, daughter of a tribal labourer, is creating art pieces

ये भी पढ़ें:  घरेलू विवाद में पत्नी पर चाकू से हमला, बाल-बाल बची बेटी; आरोपी गिरफ्तार

पेंटिंग, लिप्पन और मंडला कलाकृतियों के अलावा वह कप एवं कॉफी मग पर खूबसूरत चित्रकारी करती है. लोग उसके बनाए बुकमार्क, मिरर फ्रेम और दूसरे हैंगिंग आइटम्स भी काफी पसंद करते हैं. लोअर पंथाघाटी में एचएफआरआई के पास सड़क के किनारे पंकज मल्होत्रा की कोठी के परिसर में शाम को 2 घंटे वह अपनी कलाकृतियां सजाती हैं.

वहां से आते-जाते लोग उसकी कलाकृतियां खरीद लेते हैं. कुछ आर्डर उसे इंस्टाग्राम और सोशल मीडिया के माध्यम से भी मिल जाते हैं. भविष्य में वह शिमला में अपनी कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाना चाहती है और ई-कॉमर्स के जरिए भी देश विदेश में उनकी बिक्री उसके एजेंडे में है.Vanita, daughter of a tribal labourer, is creating art pieces

ये भी पढ़ें:  भोरंज की पंचायतों में डीसी का औचक निरीक्षण, मनरेगा से लेकर खेल मैदान तक विकास कार्यों की परखी रफ्तार

उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. अजय श्रीवास्तव का कहना है कि उनकी संस्था वनिता को शिमला में अपनी कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाने में सहयोग करेगी. एक आदिवासी मजदूर परिवार की बालिका की प्रतिभा समाज के सामने आने दूसरी बेटियां भी उससे प्रेरणा ले सकेंगी.

Hitesh Sharma
Hitesh Sharmahttps://aapkibaatnews.com
हितेश शर्मा 'आपकी बात न्यूज़ नेटवर्क' के संस्थापक और मुख्य संपादक हैं। दो दशकों से भी अधिक लंबे अपने करिअर में, वे 'अमर उजाला' 'दैनिक भास्कर' दैनिक ट्रिब्यून, पंजाब केसरी और दिव्य हिमाचल जैसे प्रमुख प्रकाशनों में महत्वपूर्ण संपादकीय जिम्मेदारियां निभाई हैं। एक अनुभवी पत्रकार और पूर्व ब्यूरो प्रमुख के तौर पर, हितेश अपनी गहन ज़मीनी रिपोर्टिंग और नैतिक व प्रभावशाली पत्रकारिता के प्रति अपने अटूट समर्पण के लिए व्यापक रूप से सम्मानित हैं। वे जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग करने में विशेषज्ञता रखते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि हर कहानी को पूरी गहराई और ज़िम्मेदारी के साथ प्रस्तुत किया जाए।

Latest Articles

Explore More