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नशे में फंसे युवाओं और उनके परिवारों का बहिष्कार करना सरासर गलत : दीपक सानन

उन्होंने कहा कि नशे में संलिप्त युवाओं का सामाजिक बहिष्कार करना उचित नहीं है। उन्होंने इस बात पर भी हैरानी जताई कि हमारा तंत्र, हमारी पूरी व्यवस्था, हमारा सामाजिक ढांचा इतना कमजोर क्या इतना है कि हमें अपने ही गांव, पंचायत व आसपास मालूम नहीं कि कौन नशे के धंधे और व्यापार में संलिप्त है।

शिमला : हिमाचल फोरम अंगेस्ट ड्रग एब्यूज ने प्रदेश के राज्यपाल और मुख्यमंत्री से नशा निवारण बोर्ड की बैठक शीघ्र आयोजित करने का आग्रह किया है, ताकि इस मुद्दे पर एकीकृत रणनीति बनाई जाए और न्यूनतम मापदंड तय किए जाएं, जिससे नशे के खिलाफ अभियान को सही दिशा में आगे बढ़ाया जा सके।

फोरम के अध्यक्ष दीपक सानन ने बताया कि निसंदेह समाज में व्याप्त नशे का संकट बहुत गहरा है और इस पर समाज की चिंता वाजिब है, लेकिन वैज्ञानिक समझ के बिना इस पर काम करना इस पूरी मुहिम को पीछे धकेल सकता है। उन्होंने नशे के खिलाफ चलाए जाने वाले अभियान को एकीकृत एवं समन्वित रूप में चलाने पर बल दिया।

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उन्होंने कहा कि नशे में संलिप्त युवाओं का सामाजिक बहिष्कार करना उचित नहीं है। उन्होंने इस बात पर भी हैरानी जताई कि हमारा तंत्र, हमारी पूरी व्यवस्था, हमारा सामाजिक ढांचा इतना कमजोर क्या इतना है कि हमें अपने ही गांव, पंचायत व आसपास मालूम नहीं कि कौन नशे के धंधे और व्यापार में संलिप्त है। सप्लाई कहां से और कैसे आ रही है, कैसे दूर-दराज के गांव तक कैसे पहुंच रहा है।

हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति के राज्य सचिव सत्यवान पुंडीर और तकनीकी सहयोगी विजय कुमार ने प्रदेश को चिट्टा मुक्त बनाने के लिए प्रदेश सरकार के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि नशे के उन्मूलन में सरकार की एक सकारात्मक सोच है, लेकिन अभियान चलाने वालों में न तो समन्वय दिखाई देता है और न ही मुद्दे के प्रति स्पष्ट सोच दिखाई देती है।

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उन्होंने कहा कि बहुत सी संस्थाएं नशा करने वालों और उनके परिवारों के सामाजिक बहिष्कार की कवायद और पकड़वाने पर इनाम घोषित करती नजर आती हैं जो बिल्कुल भी उचित और मान्य नहीं है। फोरम ने आशंका जाहिर करते हुए कहा कि इनाम की राशि तय करना या संलिप्तों का बहिष्कार करना कहीं केवल लोकप्रियता पाने के औजार के तौर पर तो इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।

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Hitesh Sharma
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हितेश शर्मा 'आपकी बात न्यूज़ नेटवर्क' के संस्थापक और मुख्य संपादक हैं। दो दशकों से भी अधिक लंबे अपने करिअर में, वे 'अमर उजाला' 'दैनिक भास्कर' दैनिक ट्रिब्यून, पंजाब केसरी और दिव्य हिमाचल जैसे प्रमुख प्रकाशनों में महत्वपूर्ण संपादकीय जिम्मेदारियां निभाई हैं। एक अनुभवी पत्रकार और पूर्व ब्यूरो प्रमुख के तौर पर, हितेश अपनी गहन ज़मीनी रिपोर्टिंग और नैतिक व प्रभावशाली पत्रकारिता के प्रति अपने अटूट समर्पण के लिए व्यापक रूप से सम्मानित हैं। वे जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग करने में विशेषज्ञता रखते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि हर कहानी को पूरी गहराई और ज़िम्मेदारी के साथ प्रस्तुत किया जाए।

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