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नगर निकायों के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष चुनाव में विधायक को वोट डालने का अधिकार देने पर हाईकोर्ट की रोक

अदालत ने स्पष्ट किया है कि पदेन सदस्य के रूप में शामिल विधायक इन चुनावों में मतदान नहीं कर सकेंगे। कोर्ट ने कहा कि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव केवल निर्वाचित पार्षदों की इच्छा और बहुमत के आधार पर ही कराया जाएगा।

शिमला : हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने नगर निगमों और अन्य नगर निकायों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव को लेकर अहम अंतरिम आदेश पारित किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि पदेन सदस्य के रूप में शामिल विधायक इन चुनावों में मतदान नहीं कर सकेंगे। कोर्ट ने कहा कि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव केवल निर्वाचित पार्षदों की इच्छा और बहुमत के आधार पर ही कराया जाएगा।

न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग को निर्देश दिए हैं कि नगर निकायों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया बिना किसी बाधा के पूरी की जाए। अदालत ने साफ किया कि इस प्रक्रिया में विधायकों को वोट देने का अधिकार नहीं होगा।

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अदालत ने अपने आदेश में कहा कि नगर निकाय स्थानीय स्वशासन की संस्थाएं हैं। यदि विधायकों को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में मतदान की अनुमति दी जाती है तो यह स्थानीय निकायों की स्वायत्तता में हस्तक्षेप होगा और जनता द्वारा स्थानीय स्तर पर दिए गए जनादेश को प्रभावित करेगा।

दरअसल, ये मामला राज्य चुनाव आयोग के खिलाफ दायर याचिकाओं के माध्यम से हाईकोर्ट पहुंचा था। विवाद इस बात को लेकर था कि क्या हिमाचल प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1994 और चुनाव नियम, 2015 के तहत विधायकों को निकायों के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के चुनाव में मतदान का अधिकार प्राप्त है।

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सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने तर्क दिया कि विधायकों को मतदान का पूर्ण अधिकार है, लेकिन हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने वर्ष 2023 में शहरी विकास विभाग द्वारा कानून विभाग की राय के आधार पर जारी उस स्पष्टीकरण पर भी रोक लगा दी, जिसमें विधायकों को मतदान का अधिकार दिए जाने की बात कही गई थी। कोर्ट ने इसे नियमों के विपरीत और विरोधाभासी माना।

खंडपीठ ने यह भी कहा कि चुनाव संबंधी नियमों की व्याख्या करने का अंतिम अधिकार राज्य चुनाव आयोग के पास है, न कि सरकार के पास। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि विधायकों के अधिकार पूरी तरह समाप्त नहीं होते हैं। हिमाचल प्रदेश नगर निगम अधिनियम की धारा 28, 30, 31 और 32 के तहत आयोजित सामान्य बैठकों और समितियों की बैठकों में विधायक पहले की तरह भाग ले सकेंगे।

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Aapki Baat News Desk
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