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शिक्षा बोर्ड को कांग्रेस का राजनीतिक स्वागत केंद्र बना दिया गया, विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर: राकेश जमवाल

भाजपा प्रदेश मुख्य प्रवक्ता राकेश जमवाल ने हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार ने संवैधानिक और शैक्षणिक संस्थाओं को भी राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बना दिया है।

शिमला : भाजपा प्रदेश मुख्य प्रवक्ता राकेश जमवाल ने हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार ने संवैधानिक और शैक्षणिक संस्थाओं को भी राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बना दिया है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष राजेश शर्मा की प्राथमिकताएं पूरी तरह सवालों के घेरे में हैं। एक ओर प्रदेश के हजारों विद्यार्थी अपनी मूल डीएमसी और मार्कशीट के लिए परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर बोर्ड प्रशासन कांग्रेस नेताओं के स्वागत-सत्कार और राजनीतिक औपचारिकताओं में व्यस्त दिखाई दे रहा है।

जमवाल ने कहा कि हाल ही में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता एवं हिमाचल मामलों की प्रभारी रजनी पाटिल के शिक्षा बोर्ड कार्यालय पहुंचने पर उनके स्वागत के लिए कर्मचारियों को लाइन में खड़ा किया गया। उन्होंने पूछा कि क्या शिक्षा बोर्ड का कार्य राजनीतिक मेहमानों का स्वागत करना है या विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित करना? यदि बोर्ड के पास राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए समय है, तो विद्यार्थियों की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता समय पर मूल दस्तावेज उपलब्ध करवाना क्यों पूरा नहीं किया जा रहा?

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उन्होंने कहा कि बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम घोषित हुए लगभग दो महीने होने को हैं, लेकिन बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को अभी तक उनकी मूल मार्कशीट और डीएमसी प्राप्त नहीं हुई है। अनेक विद्यार्थी कॉलेजों की काउंसलिंग और प्रवेश प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं, जहां अब उनसे मूल दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। डीएमसी उपलब्ध न होने के कारण विद्यार्थी और अभिभावक स्कूलों तथा बोर्ड कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, जिससे उनके भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

जमवाल ने कहा कि यदि डीएमसी की छपाई अथवा आपूर्ति में किसी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक समस्या है, तो बोर्ड प्रशासन को तत्काल इसकी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए और स्पष्ट समय-सीमा घोषित करनी चाहिए कि विद्यार्थियों को उनके मूल दस्तावेज कब तक उपलब्ध कराए जाएंगे। पारदर्शिता और जवाबदेही किसी भी संवैधानिक संस्था की पहचान होती है।

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उन्होंने कहा कि शिक्षा बोर्ड किसी राजनीतिक दल का कार्यालय नहीं, बल्कि लाखों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ी एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्था है। बोर्ड अध्यक्ष को राजनीतिक नेताओं की आवभगत से अधिक विद्यार्थियों की समस्याओं को प्राथमिकता देनी चाहिए। भाजपा मांग करती है कि बोर्ड प्रशासन तुरंत डीएमसी वितरण की प्रक्रिया पूरी करे, देरी के कारणों को सार्वजनिक करे और विद्यार्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे। बच्चों का एक शैक्षणिक वर्ष और उनका भविष्य किसी भी राजनीतिक कार्यक्रम से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

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Aapki Baat News Desk
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