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धौलाकुआं में ट्यूबवेल का उद्घाटन, पुष्प दिवस पर कुलपति ने किसानों को दी आधुनिक और प्राकृतिक खेती की दिशा

क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र (RHRTS) धौलाकुआं (सिरमौर) में पुष्प दिवस के अवसर पर किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन बड़े उत्साह के साथ किया गया, जिसमें किसानों, वैज्ञानिकों, स्टाफ और स्कूली छात्रों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।

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धौलाकुआं : क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र (RHRTS) धौलाकुआं (सिरमौर) में पुष्प दिवस के अवसर पर किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन बड़े उत्साह के साथ किया गया, जिसमें किसानों, वैज्ञानिकों, स्टाफ और स्कूली छात्रों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। कार्यक्रम में कुलपति प्रो. (कर्नल) राजेश्वर सिंह चंदेल मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे, जबकि अनुसंधान निदेशक डॉ. देविना वैद्य विशिष्ट अतिथि रहीं। कार्यक्रम के दौरान नए ट्यूबवेल और पंप हाउस का उद्घाटन भी किया गया, जिससे क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं को मजबूती मिलेगी और कृषि गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इस अवसर पर ‘हिमाचल प्रदेश के निचले पर्वतीय एवं मैदानी क्षेत्रों में गेंदा की व्यावसायिक खेती’ और “RHRTS, धौलाकुआं की प्रोफाइल’ से संबंधित प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया, जिससे किसानों को आधुनिक तकनीकों की जानकारी मिल सके।

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एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. प्रियंका ठाकुर ने केंद्र की गतिविधियों और उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए गेंदा उत्पादन की तकनीकों को सरल भाषा में समझाया। उन्होंने किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज चयन, नर्सरी तैयार करने, समय पर रोपाई और पौधों के बीच उचित दूरी बनाए रखने जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर मार्गदर्शन दिया।

अनुसंधान निदेशक डॉ. देविना वैद्य ने किसानों को फसल विविधीकरण अपनाने और पारंपरिक ज्ञान के साथ आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों को जोड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने उन्नत बीजों के उपयोग, जल प्रबंधन और संतुलित पोषण के जरिए मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने पर जोर दिया।

मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. (कर्नल) राजेश्वर सिंह चंदेल ने अपने संबोधन में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने किसानों को दलहनी फसलों के साथ अंतरवर्तीय खेती अपनाने की सलाह दी, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़े और रासायनिक खादों पर निर्भरता कम हो। उन्होंने खैरी फार्म में उगाई जा रही फसलों के लिए क्यूआर कोड टैगिंग जैसी नई पहल और इको-टूरिज्म से जोड़ने की अवधारणा भी साझा की।

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इस मौके पर पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ पौधारोपण अभियान भी चलाया गया। साथ ही स्कूली छात्रों के लिए कृषि और पर्यावरण विषय पर पेंटिंग प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें बच्चों की रचनात्मकता को सराहा गया। कार्यक्रम के अंत में विजेताओं को सम्मानित किया गया। अंत में सहायक प्राध्यापक डॉ. शिल्पा ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और आयोजकों का धन्यवाद करते हुए कार्यक्रम का समापन किया।