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मोबाइल कंपनी का पोल लगाने के लिए खोदे गड्ढे में गिरा तेंदुए का दूधमुंहा शावक… किया रेस्क्यू, मां से भी बिछड़ा

नाहन-कुमारहट्टी एनएच-907ए पर जांगीरुख के समीप मोबाइल पोल लगाने के लिए खोदे गए गहरे गड्ढे में डाली गई सीमेंट की पुलिया के भीतर से तेंदुए का दूधमुंहा शावक रेस्क्यू किया गया है।

नाहन : नाहन-कुमारहट्टी एनएच-907ए पर जांगीरुख के समीप मोबाइल पोल लगाने के लिए खोदे गए गहरे गड्ढे में डाली गई सीमेंट की पुलिया के भीतर से तेंदुए का दूधमुंहा शावक रेस्क्यू किया गया है। हालांकि, ये पता नहीं चल पाया है कि ये शावक गड्ढे में कब गिरा, लेकिन उसकी हालत को देखकर माना जा रहा है कि गत रात्रि या एक दिन पहले ये शावक अचानक गड्ढे में गिरा हो सकता है।

जानकारी के अनुसार कच्चा टैंक निवासी फहीम और जीशान शुक्रवार को जमटा की ओर जा रहे थे। रास्ते में पैराफिट के पास बैठने के दौरान उन्हें किसी छोटे जीव के रोने की आवाज सुनाई दी। मोबाइल की रोशनी से देखने पर गहरे गड्ढे में तेंदुए का एक दूधमुंहा शावक फंसा दिखा।

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दोनों युवाओं ने बिना जोखिम उठाए तुरंत वन विभाग को सूचना दी। डीएफओ नाहन अवनी भूषण राय के निर्देश पर जमटा वन परिक्षेत्र के रेंज अधिकारी प्रेम कंवर, बीट अधिकारी और वन रक्षक मौके पर पहुंचे। करीब दो घंटे तक चले रेस्क्यू अभियान में सड़क निर्माण कार्य में लगी जेसीबी मशीन की मदद से शावक के समानांतर दूसरा गड्ढा खोदा गया और सावधानीपूर्वक उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

रेंज अधिकारी प्रेम कंवर ने बताया कि शावक की आयु लगभग एक माह है। वह काफी कमजोर और भूखा था। प्राथमिक उपचार और देखभाल के लिए उसे पशु चिकित्सालय ले जाया गया है। इसके बाद उसे वन्यजीव विभाग रेणुकाजी के सुपुर्द किया जाएगा, जहां उसकी विशेष निगरानी और देखभाल होगी।

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उधर, स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि गहरे गड्ढों की समय रहते बैरिकेडिंग या सुरक्षित ढंग से ढकने की व्यवस्था की जाती तो यह हादसा टाला जा सकता था। ऐसे खुले गड्ढे न केवल वन्यजीवों बल्कि राहगीरों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकते हैं।

फहीम व जीशान की सतर्कता और वन विभाग की त्वरित कार्रवाई से एक बेजुबान वन्यजीव की जान बच गई। वहीं, अब यह घटना संबंधित एजेंसी द्वारा निर्माण कार्य के दौरान बरती गई सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रही है।

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Aapki Baat News Desk
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