नाहन : शहर में रविवार को भगवान श्री जगन्नाथ की 18वीं भव्य रथ यात्रा श्रद्धा, उत्साह और धार्मिक सौहार्द के बीच निकाली गई। उत्तर भारत के सबसे प्राचीन श्री जगन्नाथ मंदिर से निकली इस यात्रा में हिमाचल के साथ पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। विधायक अजय सोलंकी, पूर्व विधायक एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल तथा उपायुक्त सिरमौर प्रियंका वर्मा ने भगवान की आरती कर और रथ की रस्सी खींचकर यात्रा का शुभारंभ किया।
रविवार सुबह करीब 8:30 बजे बड़ा चौक स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर से यात्रा पालकियों के साथ शुरू हुई। सबसे आगे भगवान बलराम की पालकी, उसके बाद माता सुभद्रा और सबसे अंत में भगवान श्री जगन्नाथ की पालकी निकली। यात्रा हिंदू आश्रम, दिल्ली गेट और नया बाजार होते हुए ऐतिहासिक चौगान मैदान पहुंची, जहां तीनों विग्रहों को भव्य रथ पर विराजमान कराया गया।
पूजा-अर्चना और आरती के बाद रथ यात्रा चौगान मैदान से माल रोड, गुन्नूघाट, पक्का टैंक, रानीताल और कच्चा टैंक होते हुए श्री रघुनाथ मंदिर पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने भव्य स्वागत किया। इसके बाद यात्रा पुनः पालकियों के माध्यम से बस स्टैंड घाटी, छोटा चौक होते हुए बड़ा चौक स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर पहुंचकर विधि-विधान के साथ संपन्न होगी।
रथ यात्रा के दौरान पूरे शहर में धार्मिक सौहार्द की अनूठी मिसाल देखने को मिली। विभिन्न स्थानों पर हिंदू, मुस्लिम और सिख समुदाय के लोगों ने श्रद्धालुओं का स्वागत किया। जगह-जगह पुष्प वर्षा की गई और श्रद्धालुओं के लिए भंडारों का आयोजन किया गया।
2009 से भव्य स्वरूप में निकल रही रथ यात्रा
उत्तर भारत के सबसे प्राचीन श्री जगन्नाथ मंदिर में रियासत काल से शोभायात्रा निकलती रही है, लेकिन वर्ष 2009 से श्री जगन्नाथ रथ यात्रा मंडल समिति इसे भव्य स्वरूप में आयोजित कर रही है। इस वर्ष 18वीं विशाल रथ यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
शहरभर में लगे भंडारे
रथ यात्रा के स्वागत में नाहन शहर के कई स्थानों पर भंडारे लगाए गए। श्रद्धालुओं को हलवा, खीर, मिठाई, शरबत, कढ़ी-चावल, राजमा-चावल, छोले सहित विभिन्न प्रसाद वितरित किए गए। स्थानीय व्यापारियों, दुकानदारों और सामाजिक संस्थाओं ने पानी, लस्सी और जलजीरा की भी व्यवस्था की।
डॉ. राजीव बिंदल बोले- सामाजिक समरसता का प्रतीक है रथ यात्रा
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल और सांसद सुरेश कश्यप भी रथ यात्रा में शामिल हुए। डॉ. बिंदल ने कहा कि भगवान श्री जगन्नाथ की रथ यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का भी प्रतीक है। उन्होंने प्रदेशवासियों से ऐसे आयोजनों में बढ़-चढ़कर भाग लेने और सामाजिक समरसता को मजबूत करने का आह्वान किया।